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67 साल की उम्र में गुजरात की महिला ने पूरी की पीएचडी

Sat, 26 Jun 2021 09:04 AM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नाम के आगे डॉक्टर लगवाने के सपने में भले ही 50 साल लग गए लेकिन ऊषा ने उसे पूरा कर दिखाया। पति का निधन हो जाने के बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी, खूब अध्ययन करके उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल कर ही ली। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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जिस उम्र में लोग रिटायर होते हैं उस उम्र में गुजरात के वडोदरा में रहने वाली 67 वर्षीय ऊषा लोदया ऐसी महिला हैं, जिन्होंने अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाने का सपना पूरा किया है। जिस उम्र में लोग नाती- पोतों की पढ़ाई के बारे में सोच रहे होते हैं, उषा ने उस उम्र में अपनी पीएचडी पूरी कर डिग्री हासिल कर ली है। आइए जानते हैं उनकी पीएडी से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें। 

जैन धर्म में की पीएचडी

एक साक्षात्कार में ऊषा ने बताया कि वे हमेशा से ही पीएचडी करना चाहती थीं और उन्होंने अपने सपने को कभी छोड़ा नहीं इसलिए वे अपने सपने को आज 50 वर्ष बाद पूरा कर सकी हैं। उन्होंने महाराष्ट्र स्थित शत्रुंजय एकेडमी से जैन धर्म में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है। वह आगे भी जैन धर्म पर अध्ययन के काम को जारी रखेंगी। 

20 वर्ष की उम्र में हुआ विवाह

ऊषा जब सातवीं में थीं, तब वे डॉक्टर बनना चाहती थीं। मुंबई में उन्होंने झुनझुनवाला कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई शुरू कर थी, लेकिन फर्स्ट ईयर में ही उनकी शादी हो गई और बीच में ही पढ़ाई छूट गई। शादी के वक्त वे 20 साल की थीं और जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई नहीं हो पाई लेकिन अपने सपनों को जीने की ललक हमेशा जिंदा थी। 

पति का हो गया निधन

ऊषा की पीएचडी के बीच ही उनके पति का निधन हो गया, तब उनकी पढ़ाई में कुछ समय के लिए ब्रेक लग गया लेकिन उन्होंने फिर से पढ़ाई की ओर ध्यान दिया। पीएचडी में रिसर्च करने और थीसिस लिखने में उन्हें चार साल लग गए। हालांकि लॉकडाउन की वजह से उन्हें इस काम के लिए खूब समय मिला। 

 

 

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