इन नगरों में मेहमानों के खानपान की व्यवस्था की जिम्मेदारी उत्तराखंड, पंजाब व कर्नाटक सहित अलग-अलग राज्यों के सेवा संघों, संगठनों ने ली है। ट्रस्ट इस व्यवस्था में रसोई गैस सहित अन्य आवश्यक सहयोग कर रहा है।
मंदिर निर्माण के संकल्प की सिद्धि में संतों व कारसेवकों की भूमिका अहम रही है। ट्रस्ट ऐसे भक्तों की मेहमाननवाजी कर अपने को धन्य समझ रहा है। 22 जनवरी का यह गौरवपूर्ण दिन इन्हीं के त्याग और बलिदान से आया है।
- शोभन सोलंकी, प्रभारी आवास व्यवस्था तीर्थक्षेत्र पुरम
प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए संतों का आगमन जल्द शुरू हो जाएगा। 10 जनवरी के बाद संख्या बढ़ने वाली है। करीब 40 हजार लोग रोजाना भोजन करेंगे। इसके लिए अलग-अलग जगहों पर आठ नए भंडारे शुरू कर दिए जाएंगे। कारसेवकपुरम परिसर में अभी दो भंडारे चल रहे हैं। इनमें एक ट्रस्ट और एक जय गुरुदेव की कमेटी संचालित कर रही है। यहां रोजाना करीब 4-5 हजार लोग भोजन कर रहे हैं।
अगले सप्ताह के बाद अलग-अलग राज्यों से लोग पहुंचना शुरू होंगे। जिस प्रांत के लोग होंगे, उनके जिम्मेदार लोग ही भंडारा शुरू कराएंगे। कारसेवकपुरम में जय गुरुदेव कमेटी एक भंडारा और शुरू करेगी। भरत कुटी के किशनजी ने बताया कि आठ और अलग-अलग प्रांतों के भंडारे शुरू किए जाएंगे।
प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले श्रीराम का भव्य 75वां प्राकट्य महोत्सव आनंद, उल्लास और वैभव के साथ मनाने की तैयारी है। 1949 में राममंदिर में वर्तमान स्वरूप में श्रीराम के प्रकट होने के साथ यह आयोजन शुरू हुआ था। इस बार रामलला अपने नए मंदिर में आ रहे हैं। ऐसे में तीन दिनी आयोजन भी खास होने जा रहा है।
श्रीरामजन्मभूमि सेवा समिति के कोषाध्यक्ष आचार्य सत्येंद्र दास वेदांती बताते हैं, 1949 में बाबा अभिराम दास के स्वप्न में भगवान आए और राममंदिर (तब विवादित स्थल) में अपने प्रकट होने का ज्ञान दिया था। बाबा रात में ही पांच संतों के साथ स्वप्न में दिखाए गए स्थल पर पहुंचे, तो भगवान वहां दिव्य व अलौकिक मूर्ति (वर्तमान में टेंट में विराजमान) के रूप में मौजूद थे। बाबा ने विधि-विधान से आरती-पूजन किया। तबसे आज तक पौष शुक्ल पक्ष की तृतीया को इस महोत्सव का आयोजन हो रहा है। इस महोत्सव का नेतृत्व मंदिर आंदोलन के अगुवा महंत रामचंद्र परमहंस दास से लेकर श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास तक करते रहे हैं। नृत्य गोपाल अब संरक्षक हैं।
तीन दिनी महोत्सव
- 12 जनवरी को कलश पूजन।
- 13 को श्रीसूक्त, पुरसूक्त व लक्ष्मी सूत्र तथा रामचरितमानस सुंदरकांड का पारायण होगा।
- 14 को पूर्णाहुति के साथ विशाल शोभायात्रा निकलेगी और रामकोट की परिक्रमा की जाएगी। n समिति के प्रचार मंत्री महंत किशोरी शरण के अनुसार यात्रा भगवान क्षीरेश्वर नाथ मंदिर से निकलती है और वहीं आकर संपन्न होती है। यात्रा में दो रथों पर भगवान के स्वरूप रहेंगे। एक अन्य रथ में अभिराम दास का चित्रपट रहेगा।