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Ayodhya : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने संतों और कारसेवकों की मेहमाननवाजी के लिए बिछाए पलक-पांवड़े

Sat, 06 Jan 2024 05:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या

सार

अतिथियों के गरिमापूर्ण ठहराव, भावपूर्ण दर्शन और राज्य व रुचि के अनुसार भोजन की व्यवस्था की जा रही है। करीब 45 एकड़ क्षेत्र में फैले तीर्थक्षेत्रपुरम में राममंदिर आंदोलन को नेतृत्व देने वाले संतों और महापुरुषों के नाम पर छह नगर (टेंट सिटी) बसाए गए हैं। इन नगरों में एकसाथ करीब 12 हजार लोग ठहर सकते हैं।
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Ram Mandir - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्रीराममंदिर का दर्शन करने के लिए विशेष तौर पर आमंत्रित संतों व कारसेवकों की मेहमाननवाजी के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट पलक पांवड़े बिछाकर पुण्य कमाने की तैयारी कर रहा है। अतिथियों के गरिमापूर्ण ठहराव, भावपूर्ण दर्शन और राज्य व रुचि के अनुसार भोजन की व्यवस्था की जा रही है। करीब 45 एकड़ क्षेत्र में फैले तीर्थक्षेत्रपुरम में राममंदिर आंदोलन को नेतृत्व देने वाले संतों और महापुरुषों के नाम पर छह नगर (टेंट सिटी) बसाए गए हैं। इन नगरों में एकसाथ करीब 12 हजार लोग ठहर सकते हैं। सभी नगर 15 जनवरी तक तैयार कर लिए जाएंगे। 19 जनवरी की शाम से ही संतों व अन्य आमंत्रित मेहमानों का आना शुरू हो जाएगा। पढ़ें महेंद्र तिवारी की रिपोर्ट...

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आतिथ्य का प्रबंध कुछ इस तरह होगा 

  • 1 से 4 नंबर तक के नगरों में संत ठहरेंगे। प्रत्येक नगर में 1,200 कमरे हैं और हर कमरे में तीन संत रहेंगे। इस तरह 3,600 संतों के ठहरने की व्यवस्था है। 
  • हर कमरे को नंबर दिया जाएगा और ठहरने वाले संत के नाम की पट्टिका लगाई जाएगी। हर कमरे में टॉयलेट व स्नानागार के साथ मोबाइल चार्जर पाइंट की व्यवस्था रहेगी।  
  • इन चार नगरों में संतों के पड़ोस में ही सहयोगियों के ठहरने की व्यवस्था है। यहां खास तरीके से तैयार 47 गलियों में इनके ठहराव का प्रबंध किया गया है।
  •  हर गली में गरम व शीतल पानी, फीकी व मीठी चाय की व्यवस्था होगी।
  • सभी नगरों में अलग-अलग भोजनशालाएं व अलग-अलग कार्यालय होंगे। 
  • 5 व 6 नंबर नगर में स्नानागार व शौचालय के साथ डॉरमेट्री की व्यवस्था होगी। इनमें 26 जनवरी से आने वाले आमंत्रित रामभक्तों, कारसेवकों, परिजनों को ठहराया जाएगा।
  • गणतंत्र दिवस से प्रतिदिन 2-2 प्रांतों के आमंत्रित कार्यकर्ता आएंगे। दो दिन ठहरेंगे। संघ की दृष्टि से 44 प्रांत हैं। 

ये हैं छह नगर

  • पूज्य अभिराम दास नगर
  • वामदेव महाराज नगर
  • महंत अवेद्यनाथ नगर
  • परमहंस रामचंद्र दास महाराज नगर
  • मोरोपंत पिंगले नगर
  • अशोक सिंघल नगर  

कारसेवकपुरम व मणिराम दास छावनी में दो टेंट सिटी बन रही है। यहां एक-एक हजार लोगों के भोजन व ठहरने की व्यवस्था रहेगी।

रामलला हम आएंगे, लंगर भव्य चलाएंगे

इन नगरों में मेहमानों के खानपान की व्यवस्था की जिम्मेदारी उत्तराखंड, पंजाब व कर्नाटक सहित अलग-अलग राज्यों के सेवा संघों, संगठनों ने ली है। ट्रस्ट इस व्यवस्था में रसोई गैस सहित अन्य आवश्यक सहयोग कर रहा है। 

मंदिर निर्माण के संकल्प की सिद्धि में संतों व कारसेवकों की भूमिका अहम रही है। ट्रस्ट ऐसे भक्तों की मेहमाननवाजी कर अपने को धन्य समझ रहा है। 22 जनवरी का यह गौरवपूर्ण दिन इन्हीं के त्याग और बलिदान से आया है।
- शोभन सोलंकी, प्रभारी आवास व्यवस्था तीर्थक्षेत्र पुरम

40 हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था, 8 नए भंडारे 

प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए संतों का आगमन जल्द शुरू हो जाएगा। 10 जनवरी के बाद संख्या बढ़ने वाली है। करीब 40 हजार लोग रोजाना भोजन करेंगे। इसके लिए अलग-अलग जगहों पर आठ नए भंडारे शुरू कर दिए जाएंगे। कारसेवकपुरम परिसर में अभी दो भंडारे चल रहे हैं। इनमें एक ट्रस्ट और एक जय गुरुदेव की कमेटी संचालित कर रही है। यहां रोजाना करीब 4-5 हजार लोग भोजन कर रहे हैं।

अगले सप्ताह के बाद अलग-अलग राज्यों से लोग पहुंचना शुरू होंगे। जिस प्रांत के लोग होंगे, उनके जिम्मेदार लोग ही भंडारा शुरू कराएंगे।  कारसेवकपुरम में जय गुरुदेव कमेटी एक भंडारा और शुरू करेगी। भरत कुटी के किशनजी ने बताया कि आठ और अलग-अलग प्रांतों के भंडारे शुरू किए जाएंगे। 
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भव्य और दिव्य होगा श्रीराम का 75वां प्राकट्य महोत्सव

प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले श्रीराम का भव्य 75वां प्राकट्य महोत्सव आनंद, उल्लास और वैभव के साथ मनाने की तैयारी है। 1949 में राममंदिर में वर्तमान स्वरूप में श्रीराम के प्रकट होने के साथ यह आयोजन शुरू हुआ था। इस बार रामलला अपने नए मंदिर में आ रहे हैं। ऐसे में तीन दिनी आयोजन भी खास होने जा रहा है। 

श्रीरामजन्मभूमि सेवा समिति के कोषाध्यक्ष आचार्य सत्येंद्र दास वेदांती बताते हैं, 1949 में बाबा अभिराम दास के स्वप्न में भगवान आए और राममंदिर (तब विवादित स्थल) में अपने प्रकट होने का ज्ञान दिया था। बाबा रात में ही पांच संतों के साथ स्वप्न में दिखाए गए स्थल पर पहुंचे, तो भगवान वहां दिव्य व अलौकिक मूर्ति  (वर्तमान में टेंट में विराजमान) के रूप में मौजूद थे। बाबा ने विधि-विधान से आरती-पूजन किया। तबसे आज तक पौष शुक्ल पक्ष की तृतीया को इस महोत्सव का आयोजन हो रहा है। इस महोत्सव का नेतृत्व मंदिर आंदोलन के अगुवा महंत रामचंद्र परमहंस दास से लेकर श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास तक करते रहे हैं। नृत्य गोपाल अब संरक्षक हैं। 

तीन दिनी महोत्सव
  • 12 जनवरी को कलश पूजन।
  • 13 को श्रीसूक्त, पुरसूक्त व लक्ष्मी सूत्र तथा रामचरितमानस सुंदरकांड का पारायण होगा।
  • 14 को पूर्णाहुति के साथ विशाल शोभायात्रा निकलेगी और रामकोट की परिक्रमा की जाएगी। n समिति के प्रचार मंत्री महंत किशोरी शरण के अनुसार यात्रा भगवान क्षीरेश्वर नाथ मंदिर से निकलती है और वहीं आकर संपन्न होती है। यात्रा में दो रथों पर भगवान के स्वरूप रहेंगे। एक अन्य रथ में अभिराम दास का चित्रपट रहेगा।
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