संघर्ष को सहने का साहस राम ने दिया
साध्वी ऋतंभरा ने कहा, भगवान राम ने ही सभी रामभक्तों को इस संघर्ष को सहने की शक्ति और साहस दिया। उन्होंने कहा, राममंदिर का श्रेय स्वयं श्रीराम को जाता है। उन्हीं की प्रेरणा, साहस व शक्ति से सब संभव हुआ।
साध्वी ऋतंभरा ने कहा, वह खुद को और उन सभी लोगों को भाग्यशाली मानती हैं, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस आंदोलन से जुड़े रहे। राम जन्मभूमि पर रामलला के मंदिर की खुशी शब्दों में व्यक्त नहीं की जा सकती। यह ऐसा अनुभव है, जो भावातीत, कल्पनातीत और वर्णन से परे है। 500 वर्ष बाद भारत के आत्मसम्मान व गौरव की स्थापना है।
संकल्प पूरा, संघर्ष खत्म
1992 के बाद यह संभवतः पहला मौका होगा जब ये साध्वियां एकसाथ अयोध्या में राममंदिर के सामने उपस्थित हुईं। हालांकि, 1992 और 2024 की उपस्थिति में बड़ा फर्क इस बात का है कि तब जो संकल्प लिया, आज वह पूर्ण हुआ।
विवादित ढांचे को ढहाने के आरोप में सीबीआई ने भाजपा और संघ परिवार के नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर और विष्णु हरि डालमिया के साथ ही साध्वी ऋतंभरा और उमा भारती को भी आरोपी बनाया था। हालांकि, 20 सितंबर, 2020 को विशेष अदालत ने सभी को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।
खुशी से झूम उठीं साध्वी निरंजन और हेमा मालिनी
समारोह में देशभर से अतिथि पहुंचे। वहीं, मथुरा से भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने भी इस अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यहां उनकी भेंट साध्वी निरंजन ज्योति से हुई। इस ऐतिहासिक अवसर पर दोनों अपनी खुशी को जाहिर करने से रोक नहीं पाईं और प्रभु श्रीराम की भक्ति में रमकर नृत्य करनें लगीं।