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राम मंदिर विवाद: स्वामी नरेंद्रानंद बोले- जिनकी बुद्धि विकृत हो गई है, उनको इलाज की जरूरत

सार

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा सही दिन पर शास्त्र सम्मत और विधि सम्मत हो रहा है। राम ही शास्त्र हैं। उन्होंने अपना सारा जीवन शास्त्र सम्मत जीवन जिया। इससे अच्छा मुहुर्त शायद अगले दो-चार सालों में भी नहीं आएगा।
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स्वामी नरेंंद्रानंद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राम मंदिर प्राण प्रतिष्टा पर हो रही राजनीति के बीच सोमवार को गंगा सागर मेले में पहुंचे सुमेरुमठ काशी के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश हित और मानवता की हित के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंंने सबको आमंत्रण भी दिया है लेकिन जिसकी बुद्धि विकृत है, उनको इलाज की जरूरत है। राम की विरोध की जरूरत नहीं है और न ही राजनीति की जरूरत है। शुद्ध आध्यात्मिक की जरूरत है।
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उन्होंने कहा, राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा सही दिन पर शास्त्र सम्मत और विधि सम्मत हो रहा है। राम ही शास्त्र हैं। उन्होंने अपना सारा जीवन शास्त्र सम्मत जीवन जिया। इससे अच्छा मुहुर्त शायद अगले दो-चार सालों में भी नहीं आएगा। 22 जनवरी का यह मुहुर्त सबसे अच्छा है। प्रधानमंत्री का जहां तक सवाल है, वे जाएंगे, माल्यापर्ण करेंगे और आरती करेंगे या उद्घाटन करेंगे।

उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश हित और मानवता की हित के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंंने सबको आमंत्रण भी दिया है लेकिन जिसकी बुद्धि विकृत है, उनको इलाज की जरूरत है। राम की विरोध की जरूरत नहीं है और न ही राजनीति की जरूरत है। शुद्ध आध्यात्मिक की जरूरत है।
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मंदिर का काम देश हित, राष्ट्रहित और जनतंत्र की दृष्टि से पांच सौ साल में हिंदुओं का करीब पौने पांच लाख बलिदान के बाद ऐसा शुभअवसर आया है। विरोध और प्रतिकार नहीं करना चाहिए। राम हमारी आस्था हैं, अस्मिता हैं, श्रद्धा हैं, भक्ति हैं। जन-जन के चेतना के केंद्र भगवान राम हैं। सबको सद्वुब्धि दें, विवेक दें, जिससे विवाद विषाद खत्म हो। भारत में राम राज्य की स्थापना का सपना साकार हो रहा है। इसके बाद तीन काम और बाकी हैं। समान नागरिक संहिता, समान शिक्षा नीति और समान कानून बनने बाकी हैं।

उन्होंने कहा, मोदी मंदिर जाने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। पूजा अर्चना करते हैं। उनके पहले प्रधानमंत्री मंदिर जाने से डरते रहे हैं। पहले के प्रधानमंत्री मजारों में जाते रहे, मस्जिदों में जाते रहे, लेकिन मंदिरों में जाने से कुर्सी को खतरा मानते थे। लेकिन मोदी अपने त्यौहार तक सेनाओं के साथ मनाते हैं।
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