रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले श्रीराम मंदिर का शिखर भी तैयार कर लिया गया है। इसे लकड़ी, कपड़े और फूल की मदद से बनाया गया है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद इसे हटाकर विधिवत शिखर बनाया जाएगा। बिना शिखर का निर्माण हुए प्राण प्रतिष्ठा पर सवाल उठाए जा रहे थे। वजह, मंदिर के भूतल का काम ही अभी पूरा हो सका है। शिखर दूसरे तल का काम पूरा होने के बाद लगना है। दूसरी ओर, मंदिर की छवि भी बिना शिखर अधूरी लग रही थी। इसके लिए बीच का रास्ता निकाला गया।
मंदिर निर्माण से जुड़े वास्तुकार आशीष सोमपुरा ने बताया कि लोगों को मंदिर के पूर्ण स्वरूप के दर्शन के लिए फिलहाल लकड़ी, कपड़े और फूल की मदद से शिखर भी तैयार करा दिया गया है। इससे पूर्ण मंदिर का नयनाभिराम दृश्य सामने आ रहा है। हालांकि, इसकी वास्तविक ऊंचाई इससे कहीं अधिक होगी। समारोह के बाद तय योजना के अनुरूप शिखर का निर्माण किया जाएगा।
सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां
श्रीराम मंदिर के भीतर नक्काशीदार मूर्तियों वाले कॉलम इसे नयनाभिराम बना रहे हैं। तीन लेयर में मूर्तियां हैं। सबसे ऊपर की लेयर में नृत्य करतीं देवांगनाएं हैं। दूसरे में भगवान और तीसरे में देवियों की मूर्तियां हैं। यह राम मंदिर जरूर है, लेकिन इसमें सनातन के सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाई गईं हैं। मंडप के जो नाम हैं, उसी के अनुरूप मूर्तियां उकेरी गई हैं। मसलन, नृत्य मंडप में देवांगनाओं के साथ नटराज और नृत्य करते गणेश की मूर्तियां मिलेंगी। इसका डिजाइन और विस्तार इस तरह किया गया है कि कोई भी दर्शनार्थी आए, वह सनातन का ज्ञान लेकर जाए। राम मंदिर सनातन धर्म का केंद्र हो।
सात अहम पात्र भी वैकल्पिक रूप में तैयार
राम मंदिर के अंदर भगवान राम से जुड़े सात पात्रों को भी स्थान दिया जाना है, लेकिन अभी तक वे तैयार नहीं हो सके हैं। ऐसे में मंदिर के पास तय स्थान पर वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, तुलसीदास, अहिल्या, निषादराज व शबरी के स्वरूप को कपड़े व लकड़ी से बनाया है।
आशीष ने बताया कि सोमनाथ मंदिर का आर्किटेक्ट भी मेरे परिवार ने बनाया था, लेकिन इसको लेकर कोई विवाद नहीं था। इस मंदिर को लेकर 500 वर्षों का संघर्ष है। कई लोगों ने जान दिए। बतौर आर्किटेक्ट 30 वर्षों से हम भी इससे जुड़े हैं।
गर्भगृह में खड़े हो सकेंगे 15-17 लोग
आशीष सोमपुरा ने बताया कि गर्भगृह 20गुणा20 फुट का है। इसमें रामलला के विराजने के बाद करीब 15-17 लोगों के खड़े होने की जगह रहेगी। लोग वहां आरती और पूजन बहुत अच्छे से कर सकते हैं। दर्शन व्यवस्था क्या होगी, यह ट्रस्ट तय करेगा। वैसे, कई प्रसिद्ध मंदिरों में शुद्धता के लिहाज से गर्भगृह के भीतर पुजारी के अलावा कोई नहीं जाता है। कितना भी बड़ा वीआईपी हो, सोमनाथ मंदिर के गर्भगृह में नहीं जाता। हालांकि, किसे कहां से दर्शन मिलेगा, यह ट्रस्ट तय करेगा।
शब्दों में बयां नहीं कर सकते खुशी : आशीष
राम मंदिर के आर्किटेक्ट सीबी सोमपुरा के बेटे आशीष सोमपुरा डिजाइन के हिसाब से मंदिर बने, इसकी निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब जबकि प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है, बहुत अच्छा लग रहा है। मंदिर का जो प्रारूप पेपर में था, वह धरातल पर उतर आया है। उसकी हर ओर प्रशंसा हो रही है। यह सोमपुरा परिवार के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। देश-दुनिया में जिस तरह मुक्तकंठ से मंदिर के स्वरूप की सराहना हो रही है, उसे हम जीवन को सफल मानते हैं। यह हमारे लिए गर्व का क्षण है। हम अपनी भावनाएं शब्दों में बयां नहीं कर सकते हैं।