यत्र वा तत्तदधिकं तत्रापि च समाचरेत्। तत्तत्स्थाने तु बुद्ध्या तु देवतान्यासमूहतः॥"
(ईश्वरसंहिता अध्याय 3 श्लोक 165-166 पृष्ठ 32)
उनके अनुसार, बृहन्नारदीयपुराण में कहा गया है कि-
"अकृत्वा वास्तुपूजां यः प्रविशेन्नवमन्दिरम्। रोगान् नानाविधान् केशानश्नुते सर्वसङ्कटम्॥
(बृहन्नारदीय पुराण, पूर्वखण्ड, अध्याय 56 श्लोक 618-619, पत्र 116)
इसके अनुसार मंदिर में जब तक द्वार नहीं बनता, और मंदिर पर जब तक आच्छादन नहीं होता अर्थात् मंदिर जबतक नहीं ढका जाता, और वहां वास्तुशांति जबतक नहीं होती, और उसमें देवताओं को यथायोग्य माषभक्त बलि एवं पायसबलि नहीं दी जाती, और वास्तुशांति का अङ्गभूत ब्राह्मणभोजन जब तक नहीं होता, तब तक मन्दिर में देवप्रतिष्ठा नहीं हो सकती।
यह व्यवस्था बना प्राण प्रतिष्ठा का कारण
गणेश्वरशास्त्री द्राविड ने लिखा है कि लोकव्यवहार में एक मंजिल बनने पर भी वास्तु शांति करके लोग गृहप्रवेश करते हैं। बाद में गृह का ऊपरी भाग बनता है। अत: पूर्ण भवन बनने पर ही वास्तु प्रवेश होगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता। चूंकि अयोध्या का राम मंदिर देवगृह है, अतः उसमें उक्त नियम लागू हो सकता है।
अयोध्या के राममंदिर में प्रतिष्ठा के पूर्व वास्तुशांति, प्रस्तुत बलिदान एवं ब्राह्मण भोजन होने वाला है। मन्दिर के दरवाजे लग गए हैं। गर्भगृह पूर्ण रूप से शिलाओं द्वारा ढका गया है। अत: उसमें रामप्रतिष्ठा करने में कोई दोष नहीं है। मन्दिर का काम पूर्ण होने पर कर्मकाण्ड प्रदीप में उद्धृत प्रतिष्ठासार दीपिकोक्त कलशारोपणविधि के अनुसार कलशारोपण किया जा सकता है।
अन्य मुहूर्त क्यों नहीं
गणेश्वरशास्त्री द्राविड ने कहा है कि 22 जनवरी 2024 पौष शुक्ल द्वादशी सोमवार मृगशीर्ष नक्षत्र के दिन सर्वोत्तम मुहूर्त है, इसी कारण प्राण प्रतिष्ठा के लिए चयन किया गया है। उनके अनुसार इसके अलावा कई धार्मिक-ज्योतिषीय कारणों से दूसरा मुहूर्त नहीं बन रहा था जिसके कारण सब बातों का विचार करके 22 जनवरी 2024 का राम प्रतिष्ठा मुहूर्त दिया गया।
गणेश्वरशास्त्री द्राविड ने कहा है कि इसके पूर्व में आनन-फानन में जो मुहूर्त लोगों ने दिया, उसमें कुछ कमी थी। इसी कारण मंदिर तोड़े गये। इसलिए सभी बातों को ध्यान में रखकर 22 जनवरी 2024 को प्रतिष्ठा का मुहूर्त दिया गया है। इसमें लग्नस्थ गुरु की दृष्टि पश्चम, सप्तम एवं नवम पर होने से मुहूर्त उत्तम है। मकर का सूर्य हो जाने से पौषमास का वर्ज्यत्व (दोष) समाप्त हो जाता है।