श्री राम का मुकुट दिखाते मोहित आनंद
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ट्रस्ट के मार्गदर्शन में हुआ कार्य
मोहित के मुताबिक प्रभु के आभूषणों में क्या प्रतीक होंगे, कौन से रत्न जड़े जाएंगे, कितनी लंबाई, चौड़ाई व वजन होगा? ये सब ट्रस्ट के मार्गदर्शन में हुआ। ट्रस्ट से जारी बयान के अनुसार आभूषणों का निर्माण अध्यात्म रामायण, श्रीमद्वाल्मीकि रामायण, श्रीरामचरित मानस और आलवंदार स्त्रोत के अध्ययन और उनमें वर्णित श्रीराम की शास्त्र सम्मत शोभा के अनुरूप शोध व अध्ययन के बाद किया गया है। मोहित के मुताबिक आभूषण बनाने के दौरान कड़ी निगरानी रही। सीसीटीवी कैमरे से परिसर लैस रहा।
रामलला के नेत्र गढ़ने के लिए सोने की छेनी और चांदी की हथौड़ी का प्रयोग हुआ। विग्रह का शृंगार तिलक, मुकुट, धनुष, तीर, छोटा हार, पंचलड़ा, विजय हार, करधनी, बाजूबंध, दोनों हाथ और पांव के कड़े, नूपुर पायल, मुद्रिका, कमल की बेल से हुआ है। रामलला के लिए गले का हार भी बनाया गया है।
मोहित ने बताया कि सभी आभूषण हस्तनिर्मित हैं। इनका वजन और गुणवत्ता हालमार्क से प्रमाणित है। ट्रस्ट को आभूषण सौंपे जाने के बाद सोना, हीरा, माणिक्य और पन्ना की जांच इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (आईजीआई) से भी कराई गई। फिर इन्हें रामलला को धारण कराया गया।
विजयमाला का वजन दो किलो
मोहित के अनुसार प्रभु कृपा से ये कार्य संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि आभूषणों की लागत नहीं बता सकते। क्योंकि प्रभु को अर्पित होने पर वह अनमोल हो गए हैं। वहीं प्रमुख आभूषणों में रामलला को पहनाई गई विजयमाला का वजन दो किलो है। इसके अलावा 17 सौ ग्राम का मुकुट, 16 ग्राम का तिलक, 65 ग्राम की मुद्रिका, 500 ग्राम का कंठ हार, 660 ग्राम का पंचलड़ा, 750 ग्राम की करधनी, 850 ग्राम के हाथ के कड़े और 560 ग्राम के पैर के कड़े प्रमुख हैं।