रामलला की दिव्य मूर्ति और मंदिर के स्थापत्य के साथ इसमें लगने वाले दरवाजे भी अलौकिक अनुभूति देंगे। इन पर उकेरी गईं कलाकृतियां मन मोह लेंगी। सागौन की बेहद खास लकड़ी से तैयार ये दरवाजे खूबसूरती, चमक और सम्मोहक कलाकृतियों के चलते सहज ही आकर्षित करने वाले हैं।
ये दरवाजे तैयार कर रहे अनुराधा टिंबर्स इंटरनेशनल, हैदराबाद के मालिक सरत बाबू ने बताया कि दरवाजों के लिए महाराष्ट्र के बल्लारशाह गांव से सागौन की लकड़ी लाई गई है। उच्च गुणवत्ता के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध इस सागौन का टैक्सचर बहुत चिकना होता है। यह आकर्षक और आंखों को सम्मोहित करता है। इनमें तेल की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, इसलिए सैकड़ों वर्षों तक कीड़े-मकोड़े, दीमक के हमले की आशंका नहीं रहती।
वे कहते हैं, ये दरवाजे एक हजार साल खराब नहीं हो सकते। सरत बताते हैं, भारत में सागौन के तीन हजार साल पुराने दरवाजे अभी भी अच्छी स्थिति में काम कर रहे हैं। दक्षिण में रामेश्वरम, मीनाक्षीपुरम, मदुरई, कांची, तंजावुर, कर्नाटक, गुजरात व केरल के मंदिरों में ऐसे दरवाजे लगे हैं। मंदिर में द्वार का बहुत महत्व होता है। इसमें द्वार देवता होते हैं। इन पर स्थान के महत्व के अनुसार आकृतियां उकेरी गईं हैं।
60 कारीगर लगातार कर रहे काम
सरत बताते हैं कि पूरा मंदिर बनने में 300-400 से ज्यादा दरवाजे लगने का अनुमान है। दरवाजे का काम मंदिर बनने तक चलने वाला है। कुल दरवाजों की संख्या अभी तय नहीं है। तमिलनाडु के 60 कारीगर लगातार काम कर रहे हैं। इसके लिए रामसेवकपुरम में पूरा वर्कशाप लगाया गया है।
ऐसे बने हैं दरवाजे
गर्भगृह : गर्भगृह की डिजाइन बिल्कुल अलग है। यहां के दरवाजे पर खास तौर से मयूर व लताएं बनाई गई हैं। मंडप : 12 दरवाजों पर गजराज, कमल व देवमूर्तियां उकेरी गई हैं। ये देवमूर्तियां स्वागत करने वाले द्वारपाल के रूप में हैं। तिजोरी : चार कमरों के दरवाजों व भूतल से प्रथम तल पर जाने वाले दरवाजे पर अलग-अलग तरह की आकृतियां बनाई हैं।
- दरवाजों पर नागर शैली के फूल, गुजराती झरोखे भी उकेरे गए हैं। पूरा काम हाथ से किया गया है।
- मुख्य मंदिर के भूतल के लिए 18 दरवाजे बने हैं। इनमें 14 को स्वर्ण जड़ित (गोल्ड लेपिंग) करने का काम हो गया है। ये लगाए जा रहे हैं। चार पर गोल्ड लेपिंग नहीं होनी है।
- परकोटे के लिए नौ दरवाजे तैयार किए गए हैं। वह भी जल्द लग जाएगा।