Namakaran of Shri Ram: अयोध्या में राम मंदिर में भगवान राम के बालस्वरूप के प्राण प्रतिष्ठा की सभी तैयारियां लगभग हो चुकी हैं। अनुष्ठान आरंभ हो चुके हैं। श्री राम को जानने के लिए रामायण और रामचरित मानस जैसे पवित्र ग्रंथों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण और गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रामचरित मानस की रचना गई है। जहां रामचरित मानस में रामजी के राज्यभिषेक तक का वर्णन मिलता है, वहीं रामायण में श्रीराम के महाप्रयाण तक का वर्णन किया गया है। आइए जानते हैं भगवान राम के जन्म के कितने दिनों बाद उनका नामकरण हुआ और कैसे पड़ा उनका नाम राम।
पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था श्री राम का जन्म
वाल्मीकि रामायण से भगवान श्रीराम के जन्म समय, मुहूर्त, नक्षत्र और राशि की जानकारी प्राप्त होती है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार-
ततो य्रूो समाप्ते तु ऋतुना षट् समत्युय:।
ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नावमिके तिथौ॥
नक्षत्रेsदितिदैवत्ये स्वोच्चसंस्थेषु पंचसु।
ग्रहेषु कर्कटे लग्ने वाक्पताविन्दुना सह॥
प्रोद्यमाने जनन्नाथं सर्वलोकनमस्कृतम् ।
कौसल्याजयद् रामं दिव्यलक्षसंयुतम् ॥
इस श्लोक के अनुसार प्रभु राम का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को कर्क लग्न और पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था। यानी भगवान श्रीराम का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था। पुनर्वसु 27 नक्षत्रों में सातवां नक्षत्र है और इसका स्वामी बृहस्पति ग्रह है।
पुनर्वसु नक्षत्र का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष में पुनर्वसु नक्षत्र को सबसे शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र में जन्में लोगों में ईश्वर के प्रति अगाध श्रद्धा होती है। मान्यता है कि इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक विशाल ह्रदय, जिज्ञासु और अनुकूलनशील स्वभाव के होते हैं। वे दयालु, बुद्धिमान और कुशल संचारक होते हैं। ऐसे लोगों को अधर्म के पथ पर चलना पसंद नहीं होता है। यही वजह है कि इनमें भगवान श्रीराम जैसे गुण देखने को मिलते हैं।
रामलला का नामकरण
रामलला के जन्म के बाद उनका नाम दशरथ राघव रखा गया। परंतु रघु राजवंश के गुरु महर्षि वशिष्ठ ने उनका नामकरण किया। महर्षि वशिष्ठ के अनुसार, राम शब्द दो बीजाणु से मिलकर बना है। इसमें पहला अग्नि बीज और दूसरा अमृत बीज है। राम के नाम का अर्थ प्रकाश विशेष से है। इसमें रा का अर्थ प्रकाश और म का अर्थ विशेष है।
श्रीराम भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं इतना ही नहीं राम का नाम भी श्री हरि विष्णु जी से जुड़ा हुआ है। विष्णु सहस्त्रनाम में भगवान विष्णु के हजार नामों का उल्लेख मिलता है, जिसमें विष्णु जी का 394वां नाम ‘राम’ है। रामजी के साथ ही महर्षि वशिष्ठ ने ही भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण का भी नामकरण किया था।