नवीन पटनायक 1996 में अपने पिता की मृत्यु के बाद राजनीति में आए।
चुनाव तारीख की घोषणा से पहले ही पटनायक ने खेल दिया था ट्रंप कार्ड
नवीन पटनायक ने रविवार को चुनाव आयोग द्वारा चुनाव तारीखों की घोषणा से पहले ही ट्रंप कार्ड खेल दिया था। उन्होंने ओडिशा में महिला उम्मीदवारों को अपनी पार्टी में 33 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की थी। पटनायक ने यह घोषणा केंद्रपाड़ा की एक चुनावी रैली के दौरान की। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ओडिशा में महिला प्रत्याशियों के लिए 33 फीसदी आरक्षण की घोषणा करती है। इससे वहां की 21 लोकसभा सीटों में से सात सीटें महिला प्रत्याशियों के लिए आरक्षित हो गई हैं। इतना ही नहीं साल 2012 में नवीन पटनायक ने ओडिशा में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षीत सीटों को बढ़ाया था। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की 33 फीसदी भागीदारी को 50 फीसदी में तब्दील किया था।
राजनीति में प्रवेश और चौथी बार मुख्यमंत्री पद
नवीन पटनायक 1996 में अपने पिता की मृत्यु के बाद राजनीति में आए। 1996 में हुए उप-चुनाव में वह जनता दल के टिकट पर चुनाव जीते। 1997 में जनता दल टूट गई और नवीन पटनायक ने खुद की पार्टी 'बीजू जनता दल' बना ली। साल 2000 में उन्होंने ओडिशा में भाजपा के साथ गठबंधन किया और विधानसभा चुनाव जीते। इसके बाद सूबे के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2004 में नवीन पटनायक एक बार फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। साल 2007 में भारतीय जनता पार्टी से उनके रिश्तों में खटास पैदा हुई। इसके बाद साल 2009 में भाजपा के साथ बीजू जनता दल का गठबंधन खत्म हो गया। 21 मई 2009 को एक बार फिर नवीन पटनायक ने सूबे के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह उनका तीसरा कार्यकाल था। इसके बाद साल 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में पटनायक की पार्टी ने 147 विधानसभा सीटों में से 117 सीटें जीतीं। वहीं, लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने प्रदेश की 21 सीटों में से 20 सीटें जीतीं।