1996 में मुलायम सिंह यादव अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री रहे।
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मुलायम सिंह यादव इस वक्त आजमगढ़ से सांसद हैं। छह बार सांसद रहे मुलायम का राजनीतिक सफर बेहद घुमावदार रहा है। अटल बिहारी सरकार में रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभालने वाले मुलायम सिंह यादव 1989 में पहली बार यूपी के मुख्यमंत्री बने।
मुलायम का राजनीतिक सफर- एक नजर
- 1982 से लेकर 1985 तक मुलायम सिंह यादव लोक दल (बी) के यूपी अध्यक्ष रहे।
- 1985 से 1987 के तक मुलायम सिंह यादव 'जनता दल' के यूपी अध्यक्ष रहे।
- 1989 से 1991 तक मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे।
- 1989 में ही मुलायम सिंह यादव पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
- 1993 से 1995 तक मुलायम सिंह यादव दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।
- 1996 में मुलायम सिंह यादव पहली बार 11वीं लोकसभा के लिए मैनपुरी से निर्वाचित हुए।
- 1996 में मुलायम सिंह यादव अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री रहे।
- उन्होंने 1996 से लेकर 1998 तक रक्षा मंत्री का पद संभाला।
- 1998-1999 में मुलायम सिंह यादव 12वीं और 13वीं लोकसभा के लिए फिर से चुने गए।
- 1999 से 2000 के बीच मुलायम सिंह यादव पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस समिति के चेयरमैन रहे।
- 2003 में मुलायम सिंह यादव तीसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें और 2007 तक सूबे के सीएम रहे।
- 2004 में मुलायम सिंह यादव 14वीं लोकसभा के लिए चौथी बार चुने गए।
- 2009 में मुलायम सिंह यादव 15 वीं लोकसभा के लिए पांचवी बार निर्वाचित हुए।
- 2014 में मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी और आजमगढ़ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीते।
- इसके बाद उन्होंने मैनपुरी सीट से इस्तीफा दे दिया। इस वक्त वह आजमगढ़ से सांसद हैं।
पिता मुलायम को बनाना चाहते थे पहलवान
22 नवंबर 1939 को इटावा के सैफई में पैदा हुए मुलायम को उनके पिता सुघर सिंह पहलवान बनाना चाहते थे। लेकिन मुलायम की किस्मत में कुछ और ही लिखा था! राम मनोहर लोहिया से प्रभावित होकर राजनीति में आ गए और 28 साल की उम्र में पहली बार विधायक बने। राजनीति की लंबी पारी खेलने के बाद 1992 को लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में खुद की पार्टी की घोषणा की। जनाधार के लिए बहुजन समाज पार्टी से गठजोड़ किया। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पैदा हुए सियासी माहौल में मुलायम का यह प्रयोग सफल भी रहा। कांग्रेस और जनता दल के समर्थन से मुलायम सिंह फिर सत्ता में आए और मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 29 अगस्त 2003 को मुलायम सिंह यादव एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 2007 में विधानसभा चुनाव हुए मुलायम सिंह सत्ता से बाहर हो गए।
2012 के चुनाव से पहले मुलायम ने बेटे अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश सपा की कमान सौंपी। इस तरह मुलायम की दूसरी पीढ़ी ने पार्टी में दस्तक दी और सूबे के सबसे युवा मुख्यमंत्री के तौर पर कमान संभाली। साल 2015 आते-आते सपा के भीतर की पारिवारिक कलह ने मीडिया में खूब सुर्खियां बंटोरी और इसके बाद पार्टी की कमान अखिलेश के हाथों में आ गई, चाचा शिवपाल यादव ने खुद की अलग पार्टी बना ली।
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मुलायम सिंह
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विवादों में भी रहे मुलायम सिंह यादव
मुलायम सिंह यादव जब यूपी के मुख्यमंत्री थे उन्होंने अलग उत्तराखंड की मांग को लेकर दिल्ली रैली में शिरकत करने आने वाले आंदोलनकारियों पर गोलियां चलवा दीं। यह 1994 की बात है। मुलायम सिंह यादव के आदेश के बाद पुलिस ने मुजफ्फरनगर के पास रामपुर तिराहे पर आंदोलनकारियों को घेर लिया और फायरिंग कर दी। यह घटना इतिहास में रामपुर तिराहा गोलीबारी कांड के नाम से मशहूर है। घटना में 6 आंदोलनकारी मारे गए।
1995 को लखनऊ में हुए गेस्ट हाउस कांड ने मुलायम को न सिर्फ सत्ता से बेदखल किया बल्कि उनकी सियासत पर दाग भी लगा दिया। दरअसल, बसपा के समर्थन वापस लेने की घोषणा के बाद नाराज समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मायावती को बंधक बना लिया। 9 घंटे बंधक बने रहने के बाद बीजेपी नेता लालजी टंडन ने अपने समर्थकों से साथ वहां पहुंचकर मायावती को वहां से सुरक्षित निकाला।
80 साल के मुलायम एक बार फिर मैनपुरी से चुनावी मैदान में हैं।