बसपा सुप्रीमो मायावती।
- फोटो : amar ujala
मायावती 15 जनवरी 1956 को दिल्ली में जन्मी। उनकी माता का नाम रामरती और पिता का नाम प्रभु दयाल था। दिल्ली के कालिंदी कॉलेज से मायावती ने स्नातक की उपाधि ली और दिल्ली विश्वविद्यालय से एल.एल.बी और बी. एड किया। इसी दौरान मायावती ने प्रशासनिक सेवा की भी तैयारी की। वह कांशीराम के संपर्क में आई और जब उन्होंने पार्टी बनाई तो मायावती उसमें शामिल हो गईं। मायावती ने कुछ किताबें भी लिखी हैं। बसपा की 25वीं वर्षगांठ पर मायावती की किताब 'बहुजन समाज और उसकी राजनीति' का लोकार्पण कांशीराम ने किया। मायावती ने एक और किताब लिखी है- 'मेरे संघर्षमय जीवन एवं बहुजन मूवमेंट का सफरनामा'। यह किताब 15 जनवरी 2006 में रिलीज हुई।
विवादों में भी घिरी मायावती
साल 2002 में मायावती के घर पर सीबीआई की छापेमारी हुई। ताज हेरिटेज कॉरिडोर में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर मायावती और कुछ अन्य लोगों के घर सीबीआई की छापेमारी हुई। 2007 में तात्कालिक राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने कहा कि इस मामले में उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने भी सीबीआई की याचिका को खारिज कर दिया । सीबीआई ने मायावती पर आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज किया। मायावती और उनकी पार्टी ने दावा किया कि उनकी आय में पार्टी कायकर्ताओं द्वारा दिए गए तोहफे भी शामिल हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2011 में मायावती के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। 6 जुलाई 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले को खारिज कर दिया। आखिरकार 8 अक्टूबर 2013 को सीबीआई ने मायावती के खिलाफ केस बंद कर दिया।
एक भाषण ने मायावती को बना दिया था रातों-रात पॉलिटिकल स्टार
1977 में जनता दल के मंच पर दिए भाषण ने मायावती को रातों-रात पॉलिटिकल स्टार बना दिया। उस वक्त मायावती महज 21 साल की थीं। उनका यह भाषण इतना जोरदार था कि वहां स्थित अनुसूचित समाज ने राज नारायण मुर्दाबाद और जनता पार्टी मुर्दाबाद तक के नारे लगा दिए। उस वक्त मायावती दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ कर रही थीं। मायावती ने अपने इस भाषण में राज नारायण से लेकर जनता पार्टी और कांग्रेस सबको कोसा। वह गांधी के दिए 'हरिजन' शब्द पर बोल रही थीं। उन्होंने यहां तक कह डाला कि गांधी ने हमारी बेइज्जती के लिए यह शब्द दिया है। उन्होंने कहा कि अगर हम हरिजन हैं तो देवदासियों के बच्चों का क्या, जो ईश्वर की गुलाम मानी जाती हैं। मायावती ने कहा कि हमारे भगवान बाबा साहेब अंबेडकर हैं जिन्होंने कभी हरिजन शब्द का प्रयोग नहीं किया। संविधान में हमारे लिए अनुसूचित जाति लिखा, फिर स्वर्ण हमारे लिए हरिजन क्यों बोलते हैं। ये ही ऐसा वक्त था जब पहली बार कांशीराम को मायावती के बारे में पता चला था।
2019 की राजनीतिक स्थिति...
17वें लोकसभा चुनाव में मायावती यूपी में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं। यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से
बसपा 38 और सपा 37 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। दो सीटें कांग्रेस और तीन सीटें आरएलडी के लिए छोड़ी गई हैं। मायावती ने यह भी साफ कर दिया है कि कांग्रेस के साथ सूबे में उनका कोई गठबंधन नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सात सीटें छोड़कर भ्रम न फैलाएं। हमारा उनके साथ कोई गठबंधन नहीं है।