उ.प्र. विधानसभा चुनाव-2017 के लिए भाजपाध्यक्ष अमित शाह ने लखनऊ में घोषणा-पत्र जारी किया है। घोषणा पत्र में भाजपा ने केवल वादा ही नहीं किया है, बल्कि मजबूत इरादों का संदेश दे दिया है। घोषणा-पत्र की सबसे खास बात यह है कि इसमें केन्द्र सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं से लेकर उ.प्र. की जनता के हर वर्ग, संप्रदाय, जाति की मूल समस्याओं पर ध्यान दिया गया है। इसे चुनाव से पहले पार्टी के बड़े दांव के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि पार्टी ने इसे तैयार कराने की कमान केन्द्रीय उर्जा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल को सौंपी थी।
सूत्र बताते हैं कि घोषणा पत्र की तैयारी के लिए गोयल की निगरानी वाली टीम ने पूरे प्रदेश के हर हिस्से से 29 लाख लोगों से फीड बैक लिया था। 14-15 घंटे तक काम करने के आदती पीयूष गोयल और उनकी टीम ने गांव, खेत-खलिहान, कस्बाई, शहरी लोगों की समस्याओं पर खासा ध्यान दिया है। किसान, महिला, बुजुर्ग, स्त्रियों की शिक्षा, बिजली, रोजगार, कानून-व्यवस्था और छात्र-छात्राओं की समस्याओं पर ध्यान देते हुए पार्टी ने नब्ज टटोलने की कोशिश की है।
पार्टी ने इसमें हर उस वादे से बचने की कोशिश की है, जिसे समय रहते पूरा न किया जा सके। विशेषकर राम मंदिर निर्माण का मुद्दा। भाजपा ने इस मुद्दे से न तो मुंह चुराया और न ही विरोधियों को कुछ बोलने का अवसर दिया। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने साफ कहा कि पार्टी संवैधानिक दायरे में मंदिर निर्माण के लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास करेगी।
राज्य में सरकार बनने के 120 दिन के भीतर 15 साल की समस्या का समाधान का वादा किया है। इसमें 45 दिन के भीतर जमानत पर रिहा और अपराध करने वाले गुंडों अपराधियों को जेल भेजने का वादा काफी अहम है। तीन तलाक के मुद्दे पर भी पार्टी मुखर है और प्रदेश अल्पसंख्यक की महिलाओं की राय उच्चतम न्यायालय तक पहुंचाने का वादा किया है। सरकार बनने के 14 दिन के भीतर गन्ना किसानों को चेक से भुगतान, हर गरीब घर में लडक़ी पैदा होने पर 5000 रुपये की राशि देने, 24 घंटे बिजली देने, गरीबों को तीन रुपये यूनिट की दर से 100 यूनिट बिजली देने, गांव को बसों के जरिए शहर, कस्बे से जोडऩे का वादा काफी अहम है।