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अखिलेश, प्रियंका, माया, यूपी चुनाव से चमकेगा कौन?

Tue, 24 Jan 2017 09:09 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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साल 2017 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव राजनीतिक पार्टियों के शीर्ष नेताओं का भविष्य तय करेगा। इन नेताओं में अखिलेश यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी प्रमुख हैं। 
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यूपी चुनाव में जीत समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सपा के भीतर और बाहर मुलायम सिंह की राजनीतिक विरासत का असल उत्तराधिकारी साबित कर देगी। इसके साथ ही यूपी विजय उन्हें 2019 में गैर-कांग्रेस और गैर बीजेपी गुट के अगुवा के दावेदारों की सूची में भी जगह दिला देगी। 

चुनाव के बाद अखिलेश यादव खुद को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की कतार में खड़ा पा सकते हैं। यूपी में लोकसभा की सबसे ज्यादा सीटें हैं और अखिलेश यादव तीसरे मोर्च के अगुवा के रूप में भी उभर सकते हैं। अगर 2019 के आम चुनाव से पहले कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत करने में नाकामयाब रहती है, तो तीसरा मोर्चा बीजेपी के लिए मजबूत चुनौती के रूप में उभर सकता है। 
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अगर अखिलेश यादव को यूपी में दूसरा कार्यकाल मिलता है, तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह एक बेमिसाल सियासी घटना होगी। बता दें कि मुख्यमंत्री के रूप में अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए अखिलेश ने यूपी चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दिया है। विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अखिलेश यादव विकास की अपनी योजनाओं को खुले दिल से लागू कर सकते हैं और समाजवादी पार्टी के आधार को यादव-मुस्लिम से आगे ले जा सकते हैं।

मायावती के लिए 'करो या मरो' की स्थिति

- फोटो : ANI
अगर अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश चुनाव हारते हैं, तो उन्हें अपनी ही पार्टी के भीतर ही जंग लड़नी पड़ेगी। 

दूसरी ओर मायावती के लिए इस बार का विधानसभा चुनाव 'करो या मरो' जैसा है। स्थिति ये है कि या तो मायावती यूपी की सियासत में एक बार फिर अपनी पकड़ मजबूती से हासिल करें या अपनी पार्टी को बिखरते हुए देखें। 

बसपा सुप्रीमो यूपी में जाटव के साथ मुस्लिमों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहती हैं, तो वह सूबे में अगली सरकार बना सकती हैं, लेकिन सपा-कांग्रेस का गठबंधन अल्पसंख्यक वोटों को बहनजी से दूर कर सकता है।

अगर यूपी में बसपा की हार होती है, तो इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है। साथ ही कांग्रेस को भी कुछ फायदा होने की संभावना है। दोनों पार्टियां जाटव वोटों को मायावती छिनने की कोशिश कर सकती हैं। सपा के साथ गठबंधन के बाद कांग्रेस के लिए स्थिति ज्यादा बेहतर नजर आ रही है। 

कांग्रेस के लिए प्लस प्वाइंट यह भी है कि प्रियंका गांधी इस बार यूपी चुनाव में ज्यादा सक्रियता दिखा रही हैं। इन चुनावों के बाद प्रियंका गांधी की भूमिका बढ़ सकती है और 2019 के चुनावों से पहले वह पार्टी में कोई पद ले सकती हैं, साथ ही चुनाव भी लड़ सकती हैं। पार्टी नेताओं को उम्मीद है कि प्रियंका गांधी उनके निवेदन को सुनेंगी और अपने भाई की मदद के लिए पार्टी में पद स्वीकार करेंगी। 

 
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पंजाब में जीत के बाद बढ़ेगा केजरीवाल का कद!

फाइल फोटो
2014 के लोकसभा चुनावों में यूपी में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने वाली बीजेपी के लिए हार एक बड़ा झटका साबित होगी। 80 सीटों में से 71 सीटें हासिल करने वाली बीजेपी के भीतर ही खामोश आवाजें मुखर होने लगेंगी। 

बीजेपी प्रमुख अमित शाह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूर्ण विश्वास हासिल है और यह अभी तक अकाट्य रहा है, लेकिन हार मिली तो कुछ नेता और आरएसएस उनके प्रदर्शन पर उंगली उठा सकते हैं। अमित शाह की अगुवाई वाली बीजेपी ने दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों में मुंह की खाई।

माना जाता है कि बीजेपी चुनावों में प्रदर्शन के आधार पर अपने पार्टी अध्यक्षों को नहीं बदलती। दूसरी ओर यूपी के बाहर आम आदमी पार्टी को पंजाब से बहुत उम्मीदें हैं, तो गोवा में उसकी कोशिश बेहतर प्रदर्शन की है। 

अगर आम आदमी पार्टी पंजाब में जीत हासिल करती है, तो अरविंद केजरीवाल का कद बढ़ेगा और उनकी भूमिका एक राज्य के मुख्यमंत्री से ज्यादा बड़ी होगी। इसके बाद आम आदमी पार्टी अन्य राज्यों में भी पांव पसारने की कोशिश करेगी। 
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