गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव के परिणाम ने भाजपा को तगड़ा झटका दिया है। माना जा रहा है कि हिमाचल और गुजरात विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर आए इस परिणाम के जरिए जनता ने भाजपा रणनीतिकारों को सबक सीखने का मौका दिया है।
पीएम मोदी की लोकप्रियता बेशक अभी जस की तस बनी हुई है। लेकिन बीते कुछ महीनों से आ रहे जनता के रूझानों से स्पष्ट है कि भाजपा को जमीन की राजनीति पर जोर देना पडे़गा।
गुरदासपुर के अलावा केरल में विधानसभा उपचुनाव और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हुए छात्र संघ चुनाव के परिणाम सामने आए हैं। तीनों ही परिणामों में भाजपा को करारी मात झेलनी पड़ी है।
पार्टी के नेता भी अब मान रहे हैं कि आने वाले समय में जिन राज्यों के चुनाव होने हैं उनमें हिमाचल प्रदेश की राह बेशक आसान है। मगर गुजरात में कड़ी चुनौती है।
यही वजह है कि भाजपा ने समूचे देश के संगठन की ताकत गुजरात चुनाव में झोंकने का निर्णय लिया है। दिपावली के बाद युवा मोर्चा और महिला मोर्चा समेत भाजपा संगठन के तमाम नेता एवं कार्यकर्ता गुजरात कूच करेंगे।
गुरदासपुर कैसे है भाजपा के लिए सबक
गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव परिणाम को भाजपा के लिए तगड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी का यह गढ़ माना जाता रहा है। अभिनेता विनोद खन्ना लगातार तीन बार से इस सीट से चुनाव जीतते आ रहे थे।
उनकी मृत्यू के वजह से इस सीट पर उपचुनाव हुआ है। मगर परिणामों में यहां पार्टी को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के सुनील जाखड़ ने 1,93,219 वोटों से जीत हासिल की है। ये वो जाखड़ हैं जोकि बीते 6 माह पहले हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की लहर के बावजूद हार गए थे।
गुरदासपुर के लिए ये बाहरी चेहरा भी कहे जा रहे थे। मगर परिणामों ने उनकी कमजोरियों को ढकते हुए भाजपा की कलई खोल दी है। भाजपा की हार के लिए वैसे तो कई वजहें हैं।
मगर जनता के बीच पार्टी का रंग उतरता दिख रहा है। किसी भी विधानसभा हलके में भाजपा की बढ़त नहीं है। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सुरेश खजूरिया तीसरे नंबर पर रहे हैं।
गुरदासपुर में भाजपा की करारी हार के वजह
गुरदासपुर उपचुनाव में भाजपा की करारी हार के रूप में जो प्रमुख वजहें हैं कि पार्टी ने विनोद खन्ना की पत्नि को उम्मीदवार नहीं बनाया था। मगर हार के अंतर को देखकर लगता है कि जनता ने यहां सीधे भाजपा को चोट दी है।
पंजाब संपन्न राज्यों में माना जाता है। उपचुनाव के परिणाम पर जीएसटी के असर को भी बड़ी वजह माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि जीएसटी को लागू करने से आ रही दिक्कतों से व्यापारी वर्ग नाराज था। उपर से महंगाई भी आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। तो दूसरी ओर पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार बनने के बाद पहला चुनाव था इसलिए सरकार ने भी पूरी ताकत लगाई।