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कौन हैं जयपुर के नए मेयर सुनील कोठारी?: जानें म्हारा जयपुर आंदोलन से महापौर की कुर्सी तक के सफर की कहानी

Fri, 25 Sep 2026 04:42 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

‘म्हारा जयपुर, प्यारा जयपुर’ आंदोलन से जयपुर के एकीकरण की आवाज उठाने वाले सुनील कोठारी अब शहर के नए महापौर हैं। संघ की पृष्ठभूमि से भाजपा में तीन दशक से ज्यादा सक्रिय रहे कोठारी के सामने अब जयपुर की शहरी व्यवस्थाओं को बेहतर करने की चुनौती है।
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जयपुर के नवनिर्वाचित मेयर सुनील कोठारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जयपुर की सियासत में तीन दशक से ज्यादा समय तक संगठन की राजनीति करने वाले सुनील कोठारी अब शहर के नए महापौर चुने गए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे कोठारी ने अपने राजनीतिक सफर में पार्टी के कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली है। अब उनके सामने एकीकृत जयपुर नगर निगम की व्यवस्थाओं को संभालने और शहर से जुड़े कई बड़े मुद्दों पर काम करने की चुनौती है।

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तीन दशक से भाजपा संगठन में सक्रिय
सुनील कोठारी लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। वे भाजपा जयपुर शहर अध्यक्ष के साथ-साथ प्रदेश सचिव और प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने उन्हें प्रदेश स्तर पर चुनाव प्रबंधन और आर्थिक समितियों में भी जिम्मेदारी दी थी। संगठन के भीतर लंबे अनुभव के चलते जयपुर की स्थानीय राजनीति में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।

‘म्हारा जयपुर’ आंदोलन से मिली अलग पहचान
सुनील कोठारी की राजनीतिक पहचान का एक अहम हिस्सा ‘म्हारा जयपुर, प्यारा जयपुर, हमें चाहिए एक जयपुर’ आंदोलन भी रहा है। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में जब जयपुर के दो प्रशासनिक जिलों में विभाजन का मुद्दा सामने आया था, तब कोठारी ने जयपुर के एकीकरण की मांग को लेकर अभियान चलाया था।
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उन्होंने सांगानेर के सांगा बाबा मंदिर से आमेर स्थित शिला माता मंदिर तक पदयात्रा निकालने का संकल्प लिया था। फरवरी 2024 में उन्होंने यह पदयात्रा पूरी की। इस अभियान के जरिए उन्होंने जयपुर को एक प्रशासनिक इकाई के रूप में रखने की मांग को लेकर अपनी सक्रियता दिखाई।

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संगठन की राजनीति से नगर निगम तक
भाजपा संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद कोठारी ने नगर निगम चुनाव में पार्षद के तौर पर चुनावी राजनीति में कदम बढ़ाया। वार्ड से निर्वाचित होने के बाद पार्टी ने उन्हें महापौर पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया। अब वे जयपुर नगर निगम के महापौर की जिम्मेदारी संभालेंगे।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के करीबी माने जाने वाले कोठारी की परकोटा क्षेत्र में भी अच्छी पकड़ बताई जाती है। हालांकि महापौर के तौर पर उनकी भूमिका केवल राजनीतिक संगठन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें पूरे जयपुर की शहरी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालनी होगी।

राजनीति के साथ कारोबार से भी जुड़े
सुनील कोठारी पेशे से सर्राफा कारोबारी हैं और कोठारी गेम्स एंड ज्वैलरी का संचालन करते हैं। कारोबार और राजनीति दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहने के कारण उनका जयपुर के सामाजिक और व्यापारिक वर्गों से भी संपर्क रहा है।

नए मेयर के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
एकीकृत नगर निगम की कमान संभालने के बाद सुनील कोठारी के सामने जयपुर की कई पुरानी और रोजमर्रा की समस्याएं रहेंगी। इनमें शहर की सफाई व्यवस्था, परकोटा क्षेत्र में ट्रैफिक प्रबंधन, सड़कों की मरम्मत, मानसून के बाद जलभराव और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। इसके अलावा आम लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए नगर निगम स्तर पर जनसुनवाई को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना भी महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
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जयपुर के एकीकरण को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर चुके कोठारी अब एकीकृत जयपुर नगर निगम के महापौर हैं। ऐसे में उनके सामने संगठन में अर्जित लंबे अनुभव को शहर की प्रशासनिक और विकास संबंधी जरूरतों के साथ जोड़ने की जिम्मेदारी होगी।

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