प्रदेश में भारी बहुमत के बाद भारतीय जनता पार्टी में सरकार और मंत्रिमंडल के गठन की कवायद शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री पद के लिए वसुंधरा राजे 13 दिसंबर को शपथ लेंगी।
सूत्रों ने बताया कि उनके साथ आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों के शपथ लेने की तैयारी भी की जा रही है। राजे ने सोमवार को रात आठ बजे सभी भाजपा विधायकों की बैठक बुलाई, जो देर रात तक चली।
दिसंबर के तीसरे सप्ताह में विधानसभा का सत्र बुलाकर शपथ ग्रहण तथा विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, सरकारी मुख्य सचेतक व उपमुख्य सचेतक सहित विभिन्न पदों पर चयन किया जाएगा।
माना जा रहा है कि इस चुनाव में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता जीतकर आए हैं, जिससे वरिष्ठता के नाते उनमें से अधिक लोगों को ही केबिनेट में जगह मिलेगी। वे वरिष्ठ नेता केबिनेट में प्राथमिकता पाएंगे, जो पहले मंत्री व राज्य मंत्री पदों पर रह चुके हैं।
वहीं, दूसरी, तीसरी व चौथी बार विधायक बननेवाले भी कतार में होंगे, जिन्हें पिछले भाजपा कार्यकाल में मंत्री पद के लिए मौका नहीं दिया गया। ऐसे कुछ नए चेहरे भी मंत्री व राज्य मंत्री पद पर आसीन होंगे।
पुराने चेहरों को मिलेंगे खास पद
लालचंद कटारिया को पिछलीबार की तरह ही गृह विभाग, सांवरलमल जाट को पिछले अनुभवों के चलते जलदाय व कालीचरण सराफ या वासुदेव देवनानी को शिक्षा या उद्योग जैसे अहम विभाग मिल सकते हैं। देवनानी पिछली भाजपा सरकार में शिक्षा राज्य मंत्री भी रहे थे।
इधर, नरपत सिंह राजवी को भी उद्योग या चिकित्सा विभाग, युनूस खान को परिवहन विभाग, कालूलाल गुर्जर को पंचायती राज विभाग मिलने की सम्भावना है, क्योंकि इन्होंने पिछली भाजपा सरकार में ये पद सम्भाले हुए हैं। प्रभुलाल सैनी को पिछली बार की तरह कृषि विभाग मिल सकता है। इसी तरह प्रतार सिंह सिंघवी को नगरीय विकास विभाग दिए जाने की सम्भावना है।
नए चेहरे
नंदलाल मीणा को जनजाति विकास विभाग मिल सकता है, क्योंकि जनजाति क्षेत्र में इनकी अच्छी पकड़ है। संतोष अहलावत इस बार जाट के रूप में मंत्री पद के लिए दावेदार होगी। अशोक परनामी, गजेन्द्र सिंह खींवसर, विजय बंसल के नाम भी राज्य मंत्रियों में हो सकते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष के लिए तिवाड़ी या सिंह पर विचार
सूत्रों ने बताया कि पिछली सरकार में मंत्री रहे घनश्याम तिवाड़ी को इस बार विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए प्रमुख दावेदार बताया जा रहा है। इसके अलावा शाहपुरा से जीते राव राजेन्द्र सिंह भी इस पद के लिए दावेदारों में माने जा रहे हैं। राव राजेन्द्र सिंह कांग्रेस सरकार में सभापति भी रहे हैं।