Udaipur: उदयपुर से रवाना हुए सात तीर्थयात्रियों के दल में टूर ऑपरेटर रवि भावसार भी शामिल थे, जो अब तक लापता हैं। वहीं गोगुंदा निवासी ललित सोनी अपने परिवार के साथ यात्रा पर निकले थे। हादसे में ललित की पत्नी हेमलता सोनी घायल हो गईं, जिन्हें उपचार के लिए भर्ती कराया गया है।
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में गुरुवार सुबह हुए दर्दनाक बस हादसे में उदयपुर के एक अधिवक्ता की मौत हो गई है। अधिवक्ता संजय सोनी का शव हादसे के 24 घंटे बाद शुक्रवार सुबह करीब 7 किलोमीटर दूर अलकनंदा नदी से बरामद हुआ। हादसे में उदयपुर सहित विभिन्न राज्यों के तीर्थयात्री सवार थे। अब भी चार लोग लापता हैं, जिनकी तलाश में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें जुटी हुई हैं। इस हादसे में दो महिलाएं घायल भी हुई हैं।
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चारधाम यात्रा पर निकली थी बस
गुरुवार सुबह रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ से बद्रीनाथ की ओर जा रही एक तीर्थयात्रियों से भरी बस को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। टक्कर के बाद बस अनियंत्रित होकर अलकनंदा नदी में गिर गई। बस में राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुल 20 यात्री सवार थे। इनमें से सात लोग उदयपुर जिले के बताए जा रहे हैं। सभी यात्री उत्तराखंड के चारधाम यात्रा पर निकले थे।
उदयपुर निवासी अधिवक्ता का मिला शव
उदयपुर शहर के भट्टजी की बावड़ी निवासी अधिवक्ता संजय सोनी (55) का शव हादसे के 24 घंटे बाद अलकनंदा नदी से बरामद किया गया। परिजनों के अनुसार, हादसे की सूचना मिलते ही उनके बेटे दीपक सोनी उत्तराखंड के लिए रवाना हो गए थे और शुक्रवार सुबह रुद्रप्रयाग पहुंच चुके हैं। संजय सोनी की पत्नी चेतना, बहन रंजना और मां सुशीला अब तक लापता हैं।
उदयपुर से रवाना हुए सात तीर्थयात्रियों के दल में टूर ऑपरेटर रवि भावसार भी शामिल थे, जो अब तक लापता हैं। वहीं गोगुंदा निवासी ललित सोनी अपने परिवार के साथ यात्रा पर निकले थे। हादसे में ललित की पत्नी हेमलता सोनी घायल हो गईं, जिन्हें उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। ललित सोनी का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। बताया जा रहा है कि हादसे के दौरान कुछ लोग बस से गिरकर पहाड़ी किनारे अटक गए थे, जिन्हें समय रहते रेस्क्यू कर लिया गया।
हादसे में चार मौतें, कई लापता
अब तक इस हादसे में चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इनमें उदयपुर निवासी संजय सोनी, मध्यप्रदेश के राजगढ़ निवासी विशाल सोनी (42) और गौरी सोनी (41) तथा सूरत की ड्रिमी (17) शामिल हैं। हादसे के बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार तलाशी अभियान में जुटी हुई हैं। नदी के तेज बहाव और पहाड़ी इलाका होने के कारण बचाव कार्य में काफी कठिनाई आ रही है।