ये है मान्यता
दरअसल मान्यता है कि महाराणा प्रताप के पिताजी उदय सिंह के समय मेनार गांव से आगे मुगलों की एक चौकी हुआ करती थी। मुगलों की इस चौकी से मेवाड़ साम्राज्य की सुरक्षा को खतरा था। मेवाड़ की रक्षा करने के लिए मेनारिया ब्राह्मण समाज के लोग रणबांकुरे बन कर मुगलों की चौकी पर धावा बोला और उसे पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था। इस हमले में मेवाड़ की रक्षा में समाज के कुछ लोग भी शहीद हुए। उसके बाद से ही समाज के लोग मुगल चौकी पर अपनी जीत के जश्न को इसी आतिशी अंदाज के साथ मना रहे हैं। इस जश्न में उस हमले का का चित्रण दर्शाया जाता है। गांव में मेनारिया समाज के लोग अलग-अलग खेमों में बट जाते हैं और उसके बाद शुरू होता है आतिशी नजारों के साथ होली मनाने का जश्न। यह जश्न पूरी रात चलता है और लोग भी इसे देखने के लिए पूरी रात डटे रहते हैं।