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Monsoon Special: झीलों की नगरी को मानसून का इंतजार, दिलचस्प रहा 10 साल का रिकॉर्ड, जलभराव से निपटने की तैयारी

Fri, 12 Jun 2026 06:22 PM IST
उदयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर

सार

झीलों की नगरी उदयपुर के लिए मानसून सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि जल संसाधनों और पर्यटन की जीवनरेखा है। ऐसे में इस बार के मानसून को लेकर मौसम विभाग के पूर्वानुमान और प्रशासन की तैयारियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
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मानसून के स्वागत को बेताब उदयपुर - फोटो : Amar Ujala
मानसून की दस्तक से पहले झीलों की नगरी उदयपुर एक बार फिर बारिश के इंतजार में है। पिछले एक दशक में कभी रिकॉर्ड बारिश ने झीलों को छलका दिया तो कभी कमजोर मानसून ने जलसंकट की चिंता बढ़ा दी। ऐसे में इस बार भी लोगों की नजरें मौसम विभाग के पूर्वानुमान और नगर निगम की तैयारियों पर टिकी हुई हैं।

पिछले 10 वर्षों में कब हुई सबसे ज्यादा बारिश?
उदयपुर जिले में वर्ष 2019 और 2020 मानसून सीजन सबसे अधिक बारिश वाले वर्षों में शामिल रहे। इन वर्षों में सामान्य से काफी अधिक वर्षा दर्ज की गई, जिससे फतेह सागर, स्वरूप सागर सहित कई झीलें ओवरफ्लो हो गई थीं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इन वर्षों में जिले में करीब 1100 से 1300 मिमी (43 से 51 इंच) तक वर्षा दर्ज की गई थी। कई क्षेत्रों में एक ही दिन में 5 से 8 इंच तक बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
 
 
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मानसून के इंतजार में झीलों की नगरी - फोटो : अमर उजाला
कब रहा कमजोर मानसून?
पिछले दशक में वर्ष 2018 और 2023 अपेक्षाकृत कमजोर मानसून वाले वर्षों में शामिल रहे। इन वर्षों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई, जिसका असर झीलों और जलाशयों के जलस्तर पर भी दिखाई दिया। कई जल स्रोतों में पानी की आवक उम्मीद से कम रही थी।

उदयपुर का हालिया मानसून रिकॉर्ड
 
वर्ष        मानसून की स्थिति
2020     अत्यधिक वर्षा
2021     सामान्य से अधिक
2022     सामान्य
2023     सामान्य से कम
2024 सामान्य
2025 सामान्य से अधिक
2026     अनुमान जारी
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जलभराव से बचने की तैयारी - फोटो : अमर उजाला
इस बार क्या कह रहा है मौसम विभाग?
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में देशभर में मानसून सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। विभाग का अनुमान है कि इस वर्ष कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत के लगभग 92 प्रतिशत रह सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे एल-नीनो प्रभाव एक प्रमुख कारण हो सकता है। हालांकि राजस्थान के दक्षिणी हिस्सों में स्थानीय मौसमी तंत्र सक्रिय होने पर अच्छी बारिश के दौर भी बन सकते हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की गति भले कुछ धीमी रहे लेकिन जून के दूसरे पखवाड़े से राजस्थान में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

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नगर निगम ने शुरू की तैयारी - फोटो : अमर उजाला
नगर निगम ने शुरू की तैयारियां
मानसून से पहले नगर निगम ने नालों की सफाई, जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान और आपात व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। नगर निगम द्वारा मुख्य नालों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई कराई जा रही है ताकि बारिश के दौरान जलभराव की समस्या को कम किया जा सके। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और आपातकालीन टीमों की तैनाती की तैयारी भी की जा रही है।

इन क्षेत्रों में रहता है जलभराव का खतरा
सूरजपोल क्षेत्र
दिल्ली गेट
सेवाश्रम चौराहा
हिरणमगरी के कुछ हिस्से
आयड़ नदी किनारे के क्षेत्र
शहर की निचली कॉलोनियां

स्थानीय नागरिक हर वर्ष सड़कों, सीवर लाइन और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर चिंता जताते रहे हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय मंचों पर अधूरे सड़क और सीवर कार्यों को लेकर शिकायतें भी सामने आती रहती हैं।
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झीलों को मानसून का इंतजार - फोटो : अमर उजाला
झीलों को मानसून का इंतजार
उदयपुर की पहचान उसकी झीलों से है और इन झीलों के लिए मानसून जीवनदायिनी भूमिका निभाता है। यदि इस बार मानसून सामान्य या सामान्य से बेहतर रहा तो फतेहसागर, पिछोला, उदयसागर और स्वरूपसागर जैसी झीलें फिर से लबालब नजर आ सकती हैं। वहीं यदि बारिश सामान्य से कम रही तो शहर के लिए जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में इस बार का मानसून उदयपुर की झीलों और जल संसाधनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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