उदयपुर नगर निकाय चुनाव के लिए वार्डोँ की लॉटरी प्रक्रिया
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नगर निगम चुनाव को लेकर उदयपुर में वार्ड आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया सोमवार को पूरी हो गई। जिला परिषद सभागार में सुबह 11 बजे शुरू हुई लॉटरी करीब एक घंटे में पूरी हुई। जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल, एडीएम दीपेंद्र सिंह राठौड़ और जितेंद्र ओझा की मौजूदगी में नगर निगम के सभी 80 वार्डों का आरक्षण तय किया गया। आरक्षण की तस्वीर साफ होने के साथ ही चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे दावेदारों के समीकरण भी बदल गए हैं।
नगर निगम के 32 वार्ड सामान्य (ओपन) रखे गए हैं, जबकि 16 वार्ड सामान्य महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा ओबीसी के 16 वार्ड, जिनमें 11 ओबीसी ओपन और 5 ओबीसी महिला हैं, आरक्षित किए गए हैं। एससी के 8 वार्ड आरक्षित हुए हैं, जिनमें 5 एससी ओपन और 3 एससी महिला वार्ड हैं। वहीं एसटी के 8 वार्ड में 5 एसटी ओपन और 3 एसटी महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं। इस तरह कुल 80 वार्डों का आरक्षण निर्धारित हुआ है।
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मेयर पद अनारक्षित
उदयपुर नगर निगम में इस बार मेयर का पद अनारक्षित (ओपन) रखा गया है। ऐसे में किसी भी वर्ग का पात्र उम्मीदवार मेयर पद के लिए चुनाव लड़ सकता है। मेयर पद के आरक्षण की स्थिति सामने आने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों में संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है।
भाजपा-कांग्रेस ने शुरू की तैयारी
लॉटरी के बाद कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ ने कहा कि पार्टी नगर निगम चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और सभी 80 वार्डों में मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। वहीं भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि पार्टी 12 महीने चुनावी मोड में रहती है। भाजपा की ओर से सभी 80 वार्डों में सर्वे कराया जा रहा है और सर्वे के आधार पर मेरिट के अनुसार प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा।
आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद अब राजनीतिक दलों में प्रत्याशियों के चयन को लेकर मंथन तेज होगा। महिला, ओबीसी, एससी और एसटी के लिए आरक्षित वार्डों में नए दावेदार सामने आने की संभावना है, जबकि कई पुराने दावेदारों को अपना चुनावी क्षेत्र बदलना पड़ सकता है। मेयर पद के अनारक्षित रहने और वार्ड आरक्षण तय होने के बाद उदयपुर में नगर निगम चुनाव की सियासी सरगर्मी अब और तेज होने की उम्मीद है।