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राजस्थान : 'आतंकवाद राष्ट्र की आत्मा पर चोट', कन्हैया लाल हत्याकांड में HC ने पांच आरोपियों की जमानत खारिज की

Sun, 04 Oct 2026 10:26 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर

सार

राजस्थान हाई कोर्ट ने कन्हैया लाल हत्याकांड से जुड़े पांच आरोपियों वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने आतंकवाद को राष्ट्र की मनोवैज्ञानिक संप्रभुता पर सुनियोजित चोट बताया और कहा कि एनआईए की सामग्री पहली नजर में आरोपों के समर्थन के लिए पर्याप्त है।
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कन्हैयालाल हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान हाई कोर्ट ने कन्हैया लाल हत्याकांड से जुड़े पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। मुख्य न्यायाधीश संजय अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की पीठ ने वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन की याचिकाओं पर फैसला सुनाया। अदालत ने मामले की गंभीरता का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवाद और धोखेबाजी ताकतवर लोगों के नहीं, बल्कि कमजोर लोगों के हथियार हैं। पीठ ने कहा कि जघन्य आपराधिक साजिश और आतंकी घटना की गंभीरता को देखते हुए आरोपी फिलहाल जमानत के हकदार नहीं हैं।

आतंकवाद देश की मनोवैज्ञानिक संप्रभुता पर हमला

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि जब किसी अपराध का निशाना सिर्फ कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा बन जाए, तो जमानत पर विचार का आधार भी बदल जाता है। अदालत के मुताबिक आतंकवाद केवल शारीरिक हमला नहीं है, बल्कि यह देश की मनोवैज्ञानिक संप्रभुता पर सुनियोजित चोट है।

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पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाओं का उद्देश्य सिर्फ अपराध को अंजाम देना नहीं होता, बल्कि समाज में शांति भंग करना और कानून के शासन की जगह भय का माहौल पैदा करना भी होता है। न्यायाधीशों ने कहा कि न्यायाधीश का पद नागरिकों के उन संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जिम्मेदारी से जुड़ा है, जो उन्हें संविधान से मिले हैं। पीठ ने रामधारी सिंह दिनकर की सहिष्णुता पर लिखी कविता का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए की ओर से पेश की गई सामग्री पहली नजर में आरोपों के समर्थन के लिए पर्याप्त आधार उपलब्ध कराती है।

28 जून 2022 को हुई थी कन्हैया लाल की हत्या

उदयपुर में 28 जून 2022 को मोहम्मद रियाज अटारी और गौस मोहम्मद ने ग्राहक बनकर कन्हैया लाल तेली की उनकी दुकान में हत्या कर दी थी। मामले में हत्या की वजह कन्हैया लाल की सोशल मीडिया पर साझा की गई वह पोस्ट बताई गई, जिसे उन्होंने भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में साझा किया था। हत्याकांड की जांच एनआईए ने की और 22 अगस्त 2022 को आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद विशेष अदालत ने 2024 की शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए। गिरफ्तारी के बाद से पांचों आरोपी जेल में हैं। इससे पहले विशेष अदालत भी अक्टूबर और नवंबर 2024 में इन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर चुकी है।

बचाव पक्ष ने कहा- आरोपियों की भूमिका के ठोस सबूत नहीं

सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से अधिवक्ता सैयद सादात अली और अन्य वकीलों ने दलील दी कि 10 जून से 28 जून 2022 के बीच आरोपियों के मृतक की दुकान या उसके आसपास मौजूद होने का कोई ठोस सबूत रिकॉर्ड पर नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपियों ने किसी व्हाट्सऐप समूह में ऐसा कोई संदेश, वॉयस नोट या टेक्स्ट नहीं भेजा, जिसे किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या दुश्मनी बढ़ाने वाला माना जा सके। वकीलों ने मामले के दो अन्य सह-आरोपियों फरहाद मोहम्मद और मोहम्मद जावेद को मिली जमानत का हवाला देते हुए समानता के आधार पर राहत देने की मांग की। उनका कहना था कि आरोपी साढ़े चार साल से अधिक समय से जेल में हैं और मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में अभी लंबा समय लग सकता है।

एनआईए ने कहा- पांचों की भूमिका सक्रिय और जरूरी थी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजा ठाकरे ने बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पांचों आरोपियों ने अपराध को अंजाम देने में सक्रिय, अपरिहार्य और अभिन्न भूमिका निभाई। एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत पर सुनवाई के दौरान अदालत को उपलब्ध साक्ष्यों का बेहद बारीकी से मूल्यांकन करने की जरूरत नहीं होती। एजेंसी ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि यदि उपलब्ध सामग्री पहली नजर में आरोपों को सही ठहराती है, तो जमानत देने पर कानूनी रोक लागू होती है।

निचली अदालत मुख्य मुकदमे की सुनवाई जारी रखेगी

हाई कोर्ट ने जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए साफ किया कि फैसले में की गई टिप्पणियां केवल जमानत आवेदनों पर निर्णय लेने तक सीमित हैं। निचली अदालत इन टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना मुख्य मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाएगी और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्यवाही करेगी।

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