राजस्थान में सरकार और एक निजी कंपनी के बीच हुए समझौते के बाद राज्य की सरकारी राशन की दुकानों पर ब्रांडेड सामान भी बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे।
पिछले गुरुवार को राजस्थान सरकार के उपक्रम राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम और फ़्यूचर कंज़्यूमर इंटरप्राइज़ेज़ लिमिटेड के बीच इस योजना का क़रार हुआ।
सामाजिक कार्यकर्ता राज्य सरकार के इस फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं। इसी विषय पर बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह ने बात की 'राइट टू फ़ूड' कैंपेन से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव से। पढ़ें बातचीत के मुख्य अंश
पीडीएस
राजस्थान में पीडीएस में गेहूँ, चीनी और केरोसीन मिलता है, इन तीन चीज़ों पर राजस्थान सरकार सब्सिडी देती है, इन्हें पीडीएस डीलर ही देगा। इसके अलावा फ़ूड मार्केटिंग कॉर्पेोरेशन पाँच चीज़ों पर सब्सिडी देता है जिनमें मसाले, नमक, चाय इत्यादि शामिल हैं, ये चीज़ें भी उसी दाम पर मिलेंगी।
इस समझौते से पहले उचित मूल्य की दुकान पर इनके अलावा कोई और चीज़ नहीं मिलती थीं। समझौते के बाद बियानी समूह की फ़्यूचर इंटरप्राइज़ेज़ लिमिटेड कंपनी इन दुकानों पर अपने सामान बिक्री के लिए रख सकेगी, वो इन दुकानों में साबुन, तेल, सैनिटरी नैपकिन समेत जो चाहे वो चीज़ रख सकते हैं।
उचित मूल्य की दुकान के डीलर इस कंपनी को अपनी दुकान में जगह उपलब्ध कराएँगे. राज्य में मौजूद पीडीएस की कुल 25 हज़ार दुकानों में से पाँच हज़ार दुकानों के लिए ये समझौता हुआ है।