इस वर्ष कमजोर मानसून के चलते सिरोही उपखंड के अधिकांश गांवों एवं ढाणियों में औसत से कम बारिश हुई है। वहीं, सिरोही शहर की पेयजल आपूर्ति के प्रमुख स्रोत अणगौर बांध में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण जल संकट की स्थिति गहराती जा रही है। अणगौर बांध से वर्तमान में पानी की उपलब्धता शून्य होने के चलते अब शहर में मुख्य रूप से भूमिगत जल स्रोतों, नलकूपों एवं खुले कुओं के माध्यम से पेयजल वितरण किया जाएगा।
15 अक्टूबर से 72 घंटे के अंतराल पर जलापूर्ति
जल संसाधन एवं संबंधित विभाग की ओर से उपलब्ध जल की स्थिति को देखते हुए सिरोही शहर में आगामी 15 अक्टूबर 2026 से 72 घंटे के अंतराल पर जलापूर्ति किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। विभाग के अनुसार, अणगौर बांध से मिलने वाले पानी और स्थानीय जल स्रोतों से होने वाले जल उत्पादन को मिलाकर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
भूमिगत जल स्रोतों पर बढ़ेगी निर्भरता
अणगौर बांध में पानी की उपलब्धता खत्म होने के बाद शहर की पेयजल व्यवस्था के लिए भूमिगत जल स्रोतों, नलकूपों और खुले कुओं पर निर्भरता बढ़ेगी। विभाग उपलब्ध जल संसाधनों के आधार पर शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में जलापूर्ति की व्यवस्था करेगा। इसके लिए जल वितरण की समय सारणी भी जारी की गई है।
पानी की अनावश्यक खपत से बचने की अपील
विभाग ने वर्तमान जल संकट को देखते हुए शहरवासियों से पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि घरेलू कार्यों में पानी की अनावश्यक खपत से बचना बेहद जरूरी है। लोगों से नलों को खुला नहीं छोड़ने और पेयजल का इस्तेमाल केवल आवश्यक कार्यों के लिए करने का आग्रह किया गया है।
पानी की बचत में शहरवासियों की भूमिका अहम
विभाग ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बढ़ गई है। यदि शहरवासी पानी की बचत और सदुपयोग को प्राथमिकता देंगे तो उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। इससे शहर की पेयजल व्यवस्था को बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। विभाग ने सभी शहरवासियों से प्रस्तावित जल वितरण व्यवस्था में सहयोग करने और पानी की एक-एक बूंद बचाने की अपील की है।