सिरोही जिले के एक छोटे से गांव सिलवणी ने अपनी लाल मिर्ची की अनूठी पहचान बनाई है। इस गांव की मिर्च अपने तीखे और बेहतरीन स्वाद के लिए मशहूर है, जिसके चलते ग्राहक खुद यहां आकर खरीदारी करते हैं। राजस्थान के अलावा, गुजरात और महाराष्ट्र के कई इलाकों में भी इसकी भारी मांग रहती है। खास बात यह है कि किसानों को इसे बेचने के लिए कहीं बाहर नहीं जाना पड़ता, बल्कि खरीदार खुद गांव में आकर इसे खरीदकर ले जाते हैं।
सिलवणी: एक छोटा गांव, बड़ी पहचान
सिरोही जिले के पिंडवाड़ा उपखंड में स्थित सिलवणी गांव डिंगार और तेलपुर के बीच बसा हुआ है। यहां मात्र 50 घरों की आबादी निवास करती है, लेकिन इसकी लाल मिर्ची ने इसे पूरे राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में एक अलग पहचान दिलाई है। तीखी और बेहतरीन गुणवत्ता वाली यह मिर्च कई वर्षों से ग्राहकों की पहली पसंद बनी हुई है।
फरवरी-मार्च में बढ़ती है खरीदारों की भीड़
हर साल फरवरी और मार्च के महीनों में सिलवणी गांव में खरीदारों की आवाजाही बढ़ जाती है। सिरोही जिले के अलावा गुजरात और महाराष्ट्र के व्यापारी और प्रवासी लोग यहां पहुंचकर अपनी जरूरत के अनुसार मिर्च खरीदते हैं। इस दौरान गांव में मिर्च मंडी जैसा माहौल बन जाता है, जहां घरों की छतों और खुले स्थानों पर लाल मिर्च सुखाई जाती है।
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जोधपुर की मथानिया मिर्ची को टक्कर
राजस्थान में मिर्ची की बात आते ही सबसे पहले जोधपुर की मथानिया मिर्च का नाम लिया जाता है, लेकिन अब सिलवणी की मिर्च भी अपनी तीव्रता और उच्च गुणवत्ता के कारण लोगों की पसंद बन रही है। इसकी खासियत यह है कि इसका रंग जल्दी फीका नहीं पड़ता और तीखापन भी लंबे समय तक बना रहता है। कई वर्षों से इसे खरीदने वाले ग्राहक इसकी गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त हैं और दूर-दराज से इसे खरीदने आते हैं।
स्थानीय किसानों की बढ़ रही है कमाई
इस मिर्च की लोकप्रियता के कारण स्थानीय किसानों को कहीं भी अपनी फसल बेचने के लिए नहीं जाना पड़ता। खरीदार खुद गांव में आकर इसे खरीदते हैं, जिससे किसानों की अच्छी कमाई होती है। इस वजह से सिलवणी के लोगों का प्रमुख व्यवसाय अब लाल मिर्ची की खेती बन चुका है। सिरोही जिले का यह छोटा सा गांव आज अपनी लाल मिर्ची की बदौलत न केवल राजस्थान बल्कि गुजरात और महाराष्ट्र में भी अपनी धाक जमा चुका है।