फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sirohi: पंचतत्व में विलीन ब्रह्माकुमारीज की पूर्व मुख्य प्रशासिका रतनमोहिनी, अहमदाबाद में ली थी आखिरी सांस

Thu, 10 Apr 2025 06:00 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही

सार

Sirohi: 101 साल तक मानवता की सेवा में जुटी रहने वालीं दुनिया के सबसे बडे़ आध्यात्मिक संगठन ब्रह्माकुमारीज की मुखिया राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी 10 अप्रैल को पंचतत्व में विलीन हो गईं। इस मौके पर कई देशों के लोग हजारों की संख्या में जुटे थे।
विज्ञापन
पंचतत्व में विलीन ब्रह्माकुमारीज की पूर्व मुख्य प्रशासिका - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मानवता की सेवा में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाली ब्रह्माकुमारीज संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी का पार्थिव शरीर गुरुवार को माउंट आबू में पंचतत्व में विलीन हो गया। अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में अनुयायी और गणमान्यजन उपस्थित रहे। इस दौरान संस्थान की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका बीके मोहिनी, संयुक्त मुख्य प्रशासिका बीके मुन्नी, बीके संतोष, बीके मृत्युंजय, अतिरिक्त महासचिव बीके करुणा, सांसद लुम्बाराम चौधरी, बीजेपी जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी समेत अनेक श्रद्धालुओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

विज्ञापन

नहीं रहीं दादी रतनमोहिनी - फोटो : अमर उजाला
दादी के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित देश के कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, आध्यात्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रमुखों ने शोक व्यक्त किया। श्रद्धांजलि देने वालों में विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश प्रमुख राजाराम, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश चौधरी, ABVP के प्रदेश प्रमुख हीराराम बारड़ समेत विभिन्न दलों और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
 

ब्रह्माकुमारीज की वरिष्ठ दादी रतनमोहिनी का निधन - फोटो : अमर उजाला

8 अप्रैल को हुआ था निधन
ब्रह्माकुमारीज की वरिष्ठ दादी रतनमोहिनी का 8 अप्रैल, 2025 की देर रात 1:20 बजे अहमदाबाद में निधन हो गया था। वे 101 वर्ष की थीं। अंतिम संस्कार के दौरान संस्थान परिसर में श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। दादी रतनमोहिनी महज 13 वर्ष की उम्र में ब्रह्माकुमारीज संस्थान से जुड़ी थीं। साधारण ब्रह्माकुमारी के रूप में यात्रा शुरू कर उन्होंने जीवन भर निस्वार्थ सेवा करते हुए संस्थान की शीर्ष पद पर कार्य किया। चार वर्ष पूर्व उन्हें संस्थान की मुख्य प्रशासिका की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

विज्ञापन

उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला

ब्रह्मा बाबा के साथ 32 साल का लंबा सफर
1950 का वह दौर जब ब्रह्माकुमारीज का स्थानांतरण माउंट आबू हुआ था। उस वक्त दादी की आयु मात्र 26 साल थी। संस्थान में मात्र 350 लोग थे। दादी रतनमोहिनी युवावस्था में पहली बार ब्रह्मा बाबा के साथ माउंट आबू आईं थीं। विश्व सेवा और युवाओं को सद्मार्ग पर लाने की ऐसी धुन लगी कि सदा के लिए यहीं की होकर रह गईं। उन्होंने अपना पूरा जीवन युवा सशक्तिकरण, युगा जागृति में लगा दिया। युवाओं से विशेष प्रेम, स्नेह के चलते आपको सभी युवाओं की दादी कहकर पुकारते थे।

पढ़ें: फेसबुक पर युवती की फोटो वायरल करने के विवाद में दो पक्षों में भिड़ंत, लाठी-डंडे और फरसी चलीं, कई घायल    

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें