जिले में बाल विवाह रोकने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी कड़ी में जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इस बैठक में गृह विभाग द्वारा बाल विवाह की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।
बैठक में जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अक्षय तृतीया, पीपल पूर्णिमा सहित अन्य सामाजिक अवसरों पर बाल विवाह की संभावनाएं अधिक रहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत यह एक गंभीर दंडनीय अपराध है और इसे रोकने के लिए कठोर कार्रवाई का प्रावधान है। जिला प्रशासन की ओर से इसे रोकने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें सख्त निगरानी, जनजागरूकता अभियान और त्वरित कार्रवाई प्रमुख हैं।
इस दिशा में गृह विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, बाल विवाह रोकने के लिए जिला, ब्लॉक, पंचायत, ग्राम और शहरी स्तर पर विभिन्न सरकारी विभागों के कार्मिकों, पंचायत सदस्यों और पार्षदों को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं। इन लोगों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार कर आमजन को बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
जिला कलेक्टर ने बैठक में मौजूद सभी उपखंड अधिकारियों (बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी) को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में बाल विवाह की घटनाओं को सख्ती से रोकें। इसके लिए कड़ी मॉनिटरिंग की जाएगी और यदि किसी भी क्षेत्र में बाल विवाह की घटना सामने आती है तो संबंधित उपखंड अधिकारी की सीधी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
बाल विवाह रोकथाम को प्रभावी बनाने के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। इस नियंत्रण कक्ष के माध्यम से बाल विवाह से संबंधित किसी भी सूचना को तुरंत दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह होने की आशंका या सूचना मिलती है, तो वे तुरंत नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबर 02972-225327 पर संपर्क करें।