बाल कल्याण समिति द्वारा एक हफ्ते पहले पिंडवाड़ा रेलवे स्टेशन पर लावारिस हालत में मिले 6 माह के बच्चे को आवश्यक कार्रवाई के बाद माता-पिता को सुपुर्द कर दिया गया। इस दौरान समिति पदाधिकारियों और सदस्यों द्वारा परिजनों को बच्चे की प्यार से देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया।
दरअसल, 22 जनवरी 2025 को शाम करीब 5 बजे जिला चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर एक दिल दहला देने वाली सूचना मिली थी। इसमें पिंडवाड़ा रेलवे स्टेशन पर एक 6 माह के बच्चे के लावारिस हालत में मिलने की जानकारी दी गई थी। बच्चे के पास एक पत्र भी था, जिसमें उसकी माता ने उसके पालन-पोषण में असमर्थता जताते हुए उसे अनाथ आश्रम भेजने का आग्रह किया था। यह खबर न केवल चौंकाने वाली थी, बल्कि यह भी दर्शाती थी कि इस मासूम को किसी न किसी तरह के दुख और उपेक्षा का सामना करना पड़ा था।
इसके बाद जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक राजेंद्र कुमार पुरोहित के निर्देश पर चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम 30 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंची। तब तक रेलवे सुरक्षा बल ने शिशु को अपनी सुरक्षा में ले लिया था। पिंडवाड़ा पहुंचने के बाद टीम ने सबसे पहले उसका मेडिकल परीक्षण कराया और फिर उसे बाल कल्याण समिति, सिरोही के समक्ष प्रस्तुत किया। समिति के आदेशानुसार, बच्चे को राजकीय दत्तक ग्रहण एजेंसी में अस्थायी रूप से रखा गया। यहां दत्तक ग्रहण अधीक्षक भंवरसिंह परमार और उनकी टीम ने पूरी उसकी देखभाल की। उधर, रेलवे पुलिस ने इस मामले की गहराई से जांच शुरू की और बच्चे के माता-पिता के बारे में जानकारी एकत्र की।
घटना के महज एक दिन बाद, 23 जनवरी को अहमदाबाद गुजरात निवासी ईश्वरलाल पटनी एवं सुमित्रा पटनी बाल कल्याण समिति सिरोही के समक्ष पहुंचे। उन्होंने बच्चे को अपने पास रखने की इच्छा जताई, लेकिन दुर्भाग्यवश उस समय वे कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके, जिससे बच्चे को तत्काल सुपुर्द नहीं किया जा सका।
इस मामले में बाल कल्याण समिति, सिरोही की अध्यक्ष रतन बाफना, सदस्य प्रतापसिंह नून एवं उमाराम रेबारी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जिला बाल संरक्षण इकाई, अहमदाबाद से संपर्क कर सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की। जांच के बाद यह पुष्टि हुई कि शिशु के माता-पिता वास्तव में ईश्वरलाल पटनी और सुमित्रा पटनी ही हैं, उन्होंने 22 जनवरी को रेलवे स्टेशन पर बच्चे को छोड़ा था। इसके बाद, बच्चे के माता-पिता दोबारा बाल कल्याण समिति, सिरोही के समक्ष उपस्थित हुए।
माता-पिता को सौंपा बच्चा
जिला बाल संरक्षण इकाई, अहमदाबाद की रिपोर्ट, रिश्तेदारों के शपथ पत्र और घटना की पुनरावृत्ति न होने के वचन पत्र पर हस्ताक्षर के बाद, बाल कल्याण समिति ने शिशु को उसके माता-पिता के सुपुर्द करने का निर्णय लिया। बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रतन बाफना ने कहा कि यह निर्णय न केवल एक कानूनी प्रक्रिया थी, बल्कि यह उस शिशु की सुरक्षित, प्यार और देखभाल से भरी एक नई शुरुआत थी, जिसका उसे लंबे समय से इंतजार था।