सिरोही की 15 साल की एंजेल कंवर का अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन में चयन
- फोटो : अमर उजाला
झाड़ोली के स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल की छात्रा एंजेल कंवर का स्पेस किड्स चेन्नई के अंतरराष्ट्रीय मिशन शक्तिसैट में चयन हुआ है। इस उपलब्धि को हासिल करने पर परिजनों और पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। इस अवसर पर जालोर-सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी ने स्कूल पहुंचकर छात्रा का अभिनंदन किया।
108 देशों के छात्रों के साथ भारत का करेगी प्रतिनिधित्व
गौरतलब है कि भारत के बढ़ते स्पेस इकोसिस्टम के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पिंडवाड़ा, सिरोही की 15 वर्षीय छात्रा एंजेल कंवर का ISRO समर्थित शक्तिसैट मून मिशन के लिए चयन हुआ है। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्पेस एजुकेशन प्रोग्राम है, जिसमें 108 देशों के छात्र मिलकर लूनर सैटेलाइट विकसित करेंगे। कक्षा 11 की छात्रा एंजेल दुनिया के सबसे बड़े छात्र-नेतृत्व वाले उपग्रह मिशनों में से एक में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी।
प्रतिभागियों को अक्टूबर 2026 में प्रस्तावित प्रक्षेपण से पहले अंतरिक्ष यान डिजाइन, उपग्रह इंजीनियरिंग और चंद्र मिशन विकास का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। एंजेल ने अपने उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन, वैज्ञानिक योग्यता और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में रुचि के आधार पर चयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर यह स्थान हासिल किया।
21 मॉड्यूल और 365 पाठ पूरे कर हासिल की सफलता
एंजेल कंवर ने बताया कि उसने विज्ञान, उपग्रह प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष यान प्रणालियों के मूल सिद्धांतों से जुड़े 21 संरचित मॉड्यूल और 365 पाठ सफलतापूर्वक पूरे किए। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत 108 देशों के विद्यार्थियों को सैटेलाइट विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शक्तिसैट मिशन का प्रक्षेपण अक्टूबर 2026 में प्रस्तावित है, जिसके लिए सभी प्रतिभागियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
यह भी पढ़ें:
'जनता के मूड से डर गई सरकार', सचिन पायलट का भजनलाल सरकार पर बड़ा हमला
'एंजेल कंवर की सफलता पर क्या बोले सांसद'
इस अवसर पर सांसद लुंबाराम चौधरी ने कहा कि छोटे से गांव की बच्ची का इसरो समर्थित मिशन में चयन होना परिजनों, ग्रामवासियों और पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। इससे यह साबित होता है कि हमारे यहां प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। अवसर मिलने पर वे अपनी क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी, विशेषकर बेटियों के लिए अंतरिक्ष विज्ञान में करियर बनाने की नई राह खोलेगी।