पहाड़ी पर दिखता चौथ माता मंदिर।
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'मुझे मौत दे दो या फिर मेरे पति को जीवित करो'
कहा जाता है कि एक बार लड़ाई के दौरान मातेश्री नामक एक महिला के पति की मौत हो गई थी। इस पर महिला ने अपने पति के साथ सती होने की जिद की तो राव माधोसिंह ने सती प्रथा पर रोक लगा दी और महिला को सती नहीं होने दिया गया। इस पर महिला ने माता के दरबार में गुहार लगाई कि है मां या तो मुझे मौत दे दो या फिर मेरे पति को जीवित करो। इस पर माता ने महिला के पति को जीवनदान देकर जीवित किया। तभी से पूरे राजस्थान में महिलाएं माता के नाम से चौथ माता का व्रत करती हैं और तभी से महिलाएं करवा चौथ का उपवास रखती हैं और अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। राव माधोसिंह ने ही इस कस्बे को माली समाज के लोगों को गद्दी के रूप में भेंट कर दिया था। तभी से यहां माता की पूजा माली समाज के द्वारा ही की जाती है।
करवा चौथ पर उमड़ता है भक्तों का सैलाब
दिनों दिन चौथ माता के प्रति लोगों की आस्था और भी बढ़ती जा रही है और हर चौथ को यहां भक्तों की भीड़ में इजाफा हो रहा है। लाखों की संख्या में यहां भक्त आने लगे हैं। वैसे तो साल भर ही यहां भक्तों का आना लगा रहता है। मगर हिन्दी महीनों की हर चौथ और विशेष कर करवा चौथ को यहां भक्तों का सैलाब उमड़ता है। भादवा की चौथ को माता का मैला गलता है, जिसमें लाखों की संख्या में भक्तों का सैलाब उमड़ता है। लाखों श्रद्धालुओं के आने से माता के दरबार में चडावडा भी करोड़ों रुपयों में आता है। इस के चलते स्थानीय लोगों के द्वारा यहां मंदिर ट्रस्ट बनाया गया, जो मंदिर में आने वाले चढ़ावे का हिसाब रखता है। साथ ही मंदिर में विकास कार्य करवाया जाता है।