प्रदेश के प्रमुख रणथंभौर टाइगर रिजर्व में टाइगर सफारी के दौरान अनियमितताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला 28 अप्रैल का है, जब जोन नंबर 2 में सुबह की सफारी के दौरान कुछ वाहनों द्वारा निर्धारित रूट का उल्लंघन करते हुए पर्यटकों को प्रतिबंधित क्षेत्र में ले जाने की बात सामने आई। इस घटना ने वन्यजीव सुरक्षा और पर्यटन व्यवस्था की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला सामने आने के बाद पर्यटन डीएफओ संजीव शर्मा ने तीन सफारी वाहन RJ25 TA 7001, RJ25 TA 7004 और RJ25 TA 2230 को नियम उल्लंघन का दोषी मानते हुए संबंधित गाइड और वाहन चालकों से स्पष्टीकरण मांगा है। इन वाहनों से जुड़े नेचर गाइड राजेन्द्र सिंह राठौड़, विजय सिंह राठौड़ और बलवीर सिंह राठौड़ पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
निगरानी से बचने की आशंका
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि वाहन नंबर RJ25 TA 2230 का जीपीएस घटना के दिन बंद पाया गया। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि चालक ने निगरानी से बचने के लिए जान-बूझकर जीपीएस बंद किया था। बता दें कि रणथंभौर में जीपीएस मॉनिटरिंग सफारी नियंत्रण का अहम हिस्सा मानी जाती है।
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गौरतलब है कि हाल ही में वन विभाग ने जीपीएस डेटा के आधार पर 100 से अधिक वाहनों पर जुर्माना लगाया था और कई वाहनों की एंट्री तक बंद कर दी थी, ताकि नियमों का सख्ती से पालन हो सके। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं सामने आना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
तीन दिन में मांगा जवाब
पर्यटन डीएफओ संजीव शर्मा ने सभी संबंधित गाइड और वाहन चालकों को तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जवाब संतोषजनक नहीं होने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें वाहन की एंट्री बैन जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि रणथंभौर में हाल के महीनों में सफारी नियमों की अनदेखी, जीपीएस उल्लंघन और वन्यजीवों को घेरने जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित रहेगी या फिर सफारी व्यवस्था में चल रही गड़बड़ियों पर सख्त प्रहार होगा।