भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई
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देश की सर्वोच्च न्यायपालिका के मुख्य न्यायाधिपति भूषण रामकृष्ण गवई इन दिनों तीन दिवसीय निजी दौरे पर सवाई माधोपुर पहुंचे हुए हैं। उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीश भी परिवार सहित मौजूद हैं। 12 से 14 सितंबर तक चलने वाले इस प्रवास के दौरान उन्होंने शनिवार को रणथंभौर नेशनल पार्क का भ्रमण किया और पार्क प्रबंधन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
बाघों और वन्यजीवों के संरक्षण पर जोर
इस मौके पर सीजेआई गवई ने देश में बाघों और वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिकारियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने के लिए कानून में सख्त प्रावधान तो हैं, लेकिन पोचिंग को रोकने के लिए इन्हें और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में वनों और वन्यजीवों के संरक्षण में कानून की अहम भूमिका रही है, जिसकी वजह से जंगल आज भी संरक्षित हैं। साथ ही उन्होंने वन्यजीवों के लिए कॉरिडोर बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
नालसा और लोक अदालत को बताया सकारात्मक पहल
मुख्य न्यायाधिपति ने नालसा की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से लाखों मुकदमों का निस्तारण आपसी रजामंदी से किया जा रहा है। यह न्याय व्यवस्था में एक बड़ा और सकारात्मक कदम है। उन्होंने इसे जनता और अदालत, दोनों के हित में लाभकारी बताया।
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हाई कोर्ट की नई बेंच पर दी प्रतिक्रिया
मुख्य न्यायाधिपति ने इस अवसर पर देश के कोल्हापुर में मुंबई हाई कोर्ट की एक बेंच बनाने की पहल पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में राजस्थान में भी इस प्रकार की व्यवस्था होती है, तो यह अपने आप में एक सकारात्मक प्रयास होगा। हालांकि फिलहाल इस बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की जा सकती।
अन्य न्यायाधीश भी रहे मौजूद
इस दौरे के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश संदीप मेहता और विजय विश्नोई भी मौजूद रहे। सीजेआई और अन्य न्यायाधीशों के इस प्रवास ने न केवल सवाई माधोपुर बल्कि पूरे राजस्थान के लिए वन्यजीव संरक्षण और न्याय व्यवस्था को लेकर सकारात्मक संदेश दिया है।
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