सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी क्षेत्र के ग्राम खण्डीप में पांचना कमाण्ड क्षेत्र के किसानों का धरना शुक्रवार को 15वें दिन भी पूरे जोश और उत्साह के साथ जारी रहा। राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशानुसार पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में बड़ी संख्या में किसानों, महिलाओं, युवाओं और सर्वसमाज के लोगों की भागीदारी देखने को मिली।
महापंचायत में उमड़ा जनसैलाब
धरना स्थल पर आयोजित किसान महापंचायत में हजारों किसानों की मौजूदगी ने आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की। विभिन्न गांवों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और निजी वाहनों से पहुंचे। कई स्थानों से किसान डीजे की धुन पर नाचते-गाते हुए धरना स्थल पहुंचे, जिससे माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा।
'किसानों के अधिकार की लड़ाई'
महापंचायत को संबोधित करते हुए विधायक रामकेश मीना ने कहा कि यह आंदोलन किसानों के अधिकार और न्याय की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार किसानों को उनका हक नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि किसान कोई विशेष पैकेज नहीं, बल्कि अपने हिस्से का पानी मांग रहे हैं।
गृहमंत्री के दौरे पर भी उठाए सवाल
विधायक ने कहा कि हाल ही में राज्य के गृहमंत्री धरना स्थल से कुछ किलोमीटर दूर पहुंचे थे, लेकिन किसानों के बीच आकर उनकी समस्याएं सुनने का प्रयास नहीं किया गया। इससे किसानों में निराशा और नाराजगी बढ़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी भी दबाव में नहीं रुकेगा।
गोलमा देवी ने सरकार को दी चेतावनी
महापंचायत में किसानों का समर्थन करने पहुंचीं गोलमा देवी ने कहा कि जब तक पांचना बांध से नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने किसानों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि किसी भी दबाव में आने की जरूरत नहीं है। गोलमा देवी ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की पालना कराना सरकार की जिम्मेदारी है और किसानों को उनका अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने मंच से कई बार "पानी खुलना चाहिए" के नारे लगवाए और घोषणा की कि जब तक नहरों में पानी नहीं आता, तब तक वे किसानों के साथ धरना स्थल पर डटी रहेंगी। उनके इस ऐलान का किसानों ने जोरदार स्वागत किया।
कृषि मंत्री को बुलाने की मांग
विधायक रामकेश मीना ने गोलमा देवी का आभार जताते हुए आग्रह किया कि कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा भी जल्द धरना स्थल पर पहुंचें, ताकि किसानों का मनोबल बढ़े और समस्या के समाधान की दिशा में ठोस पहल हो सके।
धरना स्थल पर भोजन, पेयजल, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का संचालन गांववार जिम्मेदारियों के आधार पर किया जा रहा है। 19 से 20 जून तक कुंसाय, मैड़ी, फुलवाड़ा और खोड़पुरा के ग्रामीणों ने व्यवस्थाएं संभालीं। वहीं 20 से 21 जून तक दानालपुर, हिंगोट, अरणियां, बनवारीपुर और कुट्टीन का पुरा गांवों के किसानों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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27 जून तक का अल्टीमेटम
महापंचायत में किसानों ने पूर्व घोषित चेतावनी को दोहराते हुए कहा कि यदि 27 जून तक सरकार ने उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 28 जून से आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि सरकार ने समय रहते समाधान नहीं निकाला तो रेल रोको आंदोलन सहित बड़े जनआंदोलन की रणनीति लागू की जाएगी। किसानों ने राज्य सरकार से हाईकोर्ट के आदेशों की पालना सुनिश्चित करते हुए शीघ्र नहरों में पानी छोड़ने की मांग की है।