राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने शनिवार को किसानों के आंदोलन के समर्थन में तीन संसदीय समितियों से इस्तीफा दे दिया है। बेनीवाल ने अपना इस्तीफा पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजा है।
बेनीवाल ने इस्तीफे का प्रमुख कारण बाड़मेर में उन पर हुए हमले से जुड़े मामले में विशेषाधिकार हनन का मामला बना, जिसमें संसद के दखल के बाद भी एक साल तक मुकदमा दर्ज नहीं होना व कार्रवाई नहीं होना लिखा हैं।
इसके अलावा उन्होंने अपने इस्तीफा पत्र में एक सीमेंट कंपनी को गलत तथ्य के आधार पर पर्यावरण स्वीकृति देने और राजस्थान से निकलने वाले कच्चे तेल से राज्य को मिलने वाली रॉयल्टी से राजस्थान को वंचित रखने पर भी अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि इन दोनों ही मुद्दों को मैंने समितियों के समक्ष रखा, लेकिन उस पर कोई कार्यवाही अब तक नहीं हुई। ऐसे में मेरा मानना है कि इन समितियों का कोई औचित्य नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से तीनों कृषि कानून किसान विरोधी हैं। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जी से हमने अपील भी की है। एनडीए गठबंधन में होने के नाते मैंने पत्र भी लिखा कि अगर आप इन्हें वापस नहीं लेंगे तो हम एनडीए के समर्थन पर पुनर्विचार करेंगे।
2 लाख समर्थकों के साथ दिल्ली के लिए रवाना होंगे
बेनीवाल 26 दिसंबर को 2 लाख समर्थकों के साथ दिल्ली के लिए रवाना होंगे। जयपुर में आज हुई एक बैठक के बाद बेनीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी किसानों के साथ हमेशा से खड़ी है और आगे भी रहेगी। उन्होंने बताया कि किसानों में केंद्र के इस बिल के खिलाफ रोष है।
तीनों कृषि कानून किसान विरोधी
उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से तीनों कृषि कानून किसान विरोधी हैं। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जी से हमने अपील भी की है। एनडीए गठबंधन में होने के नाते मैंने पत्र भी लिखा कि अगर आप इन्हें वापस नहीं लेंगे तो हम एनडीए के समर्थन पर पुनर्विचार करेंगे।