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Rajasthan News: साइबर जांच में फ्रीज खातों से बढ़ रही थी परेशानी, अब GRM मॉड्यूल बनेगा राहत का रास्ता

Tue, 19 May 2026 08:27 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

साइबर ठगी की जांच में फ्रीज बैंक खातों से परेशान लोगों को अब GRM मॉड्यूल से राहत मिलेगी। राजस्थान पुलिस के अनुसार नई ऑनलाइन व्यवस्था के तहत खाताधारक बैंक शाखा के जरिए शिकायत दर्ज कर खाते को अनफ्रीज कराने की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

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साइबर अपराध - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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साइबर ठगी के मामलों में अपराधियों तक पहुंचने के लिए जांच एजेंसियां अक्सर संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कर देती हैं। लेकिन कई बार इस कार्रवाई की चपेट में ऐसे लोग भी आ जाते हैं, जिनका सीधे तौर पर किसी साइबर फ्रॉड से संबंध नहीं होता। खाते फ्रीज होने के बाद आमजन को बैंक, पुलिस और साइबर कार्यालयों के लगातार चक्कर लगाने पड़ते थे। अब इसी समस्या के समाधान के लिए GRM (Grievance Redressal Mechanism) मॉड्यूल को प्रभावी तरीके से लागू किया गया है।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा विकसित यह मॉड्यूल साइबर जांच के दौरान फ्रीज या लियन किए गए खातों की शिकायतों के ऑनलाइन निस्तारण की व्यवस्था उपलब्ध कराता है। राजस्थान पुलिस का दावा है कि इससे खाताधारकों को पारदर्शी और समयबद्ध राहत मिल सकेगी।

जांच के दौरान निर्दोष खाताधारक भी होते थे प्रभावित

साइबर अपराधों में ठग अक्सर कई बैंक खातों के जरिए रकम ट्रांसफर करते हैं। जांच एजेंसियां ट्रांजेक्शन ट्रेल के आधार पर खातों को होल्ड या फ्रीज कर देती हैं। ऐसे मामलों में कई बार व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और छोटे कारोबारियों के खाते भी प्रभावित हो जाते थे, जिससे उनकी रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियां ठप हो जाती थीं।

अब GRM मॉड्यूल के जरिए खाताधारक सीधे बैंक शाखा में आवेदन देकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवा सकेंगे। बैंक KYC और ट्रांजेक्शन की जांच के बाद मामला पुलिस जांच अधिकारी को भेजेगा, जो पूरे ट्रांजेक्शन ट्रेल की जांच करेगा।

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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी सुना जाएगा पक्ष

नई व्यवस्था में खाताधारक को बार-बार थाने बुलाने की बजाय जरूरत पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी उसका पक्ष सुना जा सकेगा। जांच पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारी खाते को अनफ्रीज करने, लियन हटाने या शिकायत खारिज करने का निर्णय लेगा।

यदि शिकायत थाना स्तर पर निरस्त होती है, तो खाताधारक जिला और राज्य स्तर के ग्रीवेंस रिड्रेसल ऑफिसर के समक्ष अपील भी कर सकेगा।

जवाबदेही तय, डिजिटल ट्रैकिंग पर जोर

राजस्थान पुलिस के अनुसार GRM प्रणाली में पहली बार बैंक और पुलिस दोनों स्तरों पर जिम्मेदारी स्पष्ट की गई है। राज्य स्तर से लेकर शाखा स्तर तक अधिकारियों को जवाबदेही दी गई है, ताकि शिकायतों के निस्तारण में देरी और भ्रम की स्थिति कम हो सके। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में ओटीपी, बैंक डिटेल और निजी वित्तीय जानकारी साझा न करें। साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या

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राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

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