राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में करीब 10 साल का बाघ 'जय' अपना दबदबा बनाए हुए है। आरबीटी-108 के नाम से पहचाने जाने वाला यह बाघ जोन 6 से 10 तक के बड़े इलाके में सक्रिय है। तीन से चार प्रतिस्पर्धी नर बाघों की मौजूदगी के बावजूद जय अपने क्षेत्र की सीमाओं की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है।
सवाई माधोपुर स्थित रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में करीब 10 वर्ष की उम्र का बाघ 'जय' अपनी मजबूत बादशाहत कायम रखे हुए है। आधिकारिक तौर पर आरबीटी 108 कोड से पहचाने जाने वाले इस वयस्क नर बाघ का दबदबा पार्क के जोन 6 से लेकर जोन 10 तक के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। आसपास तीन से चार प्रतिस्पर्धी नर बाघों की मौजूदगी के बावजूद यह बाघ अपने इलाके की सीमाओं की सुरक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है।
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दस वर्ष से जारी बादशाहत
रणथम्भौर के जंगलों में बाघ जय का जन्म वर्ष 2016 में हुआ था। स्थानीय गाइडों ने इस बाघ का नाम जय रखा। पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों ने इसे पहली बार वर्ष 2016 में इसकी मां बाघिन टी-08 लाडली के साथ देखा था। लगभग दो वर्ष की उम्र तक अपनी मां के साथ रहने के बाद जय उससे अलग हो गया और अकेले जंगल में विचरण करने लगा। दस साल की उम्र में भी यह वयस्क बाघ जंगल में पूरी तरह सक्रिय है।
गश्त और सीमा निर्धारण
बाघ जय अपने अधिकार वाले इलाके को सुरक्षित रखने के लिए नियमित रूप से गश्त करता है। अपने क्षेत्र की सीमाएं तय करने के लिए यह मूत्र छिड़ककर गंध के निशान छोड़ता है। इसके अलावा वह पेड़ों के तनों पर अपने पंजों से खरोंच लगाता है और जमीन खुरचकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है। पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों ने जोन 6, 7 और 10 में कई मौकों पर इसकी गर्जना दर्ज की है।
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संघर्ष से भरे शरीर पर निशान
अपने क्षेत्र के पास तीन से चार अन्य प्रतिस्पर्धी नर बाघों की उपस्थिति के कारण जय को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जब भी कोई दूसरा नर बाघ इसके क्षेत्र में घुसने की कोशिश करता है, तो जय उसका पीछा करके उसे सीमा से बाहर खदेड़ देता है। अन्य बाघों के साथ हुए भीषण संघर्षों के कारण जय के शरीर पर चोटों और जख्मों के पुराने निशान दिखाई देते हैं।
उम्र के साथ बना दबदबा
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के डीसीएफ मानस सिंह के अनुसार करीब 10 वर्ष की उम्र में जय एक वयस्क नर बाघ की श्रेणी में आता है। उम्र बढ़ने के बावजूद वह अपने क्षेत्र में विचरण करने और गंध के निशान छोड़ने जैसी गतिविधियों में लगातार व्यस्त है।