लेखक और राजनीतिक विश्लेषक नवीन चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश के सियासी घटनाक्रम को कैसे देखते हैं?
लेखक और राजनीतिक विश्लेषक नवीन चौधरी कहते हैं, कांग्रेस राज्यसभा की तीन सीटें जीते या दो इसका असर पार्टी पर कम, 2023 के विधानसभा चुनाव में ज्यादा होगा। राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रहे सियासी घटनाक्रम को देखते हुए लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। लोग सोशल मीडिया पर लगातार पूछ रहे हैं कि अगर यही होना है तो क्या राज्यसभा चुनाव होने भी चाहिए? पुलिस विधायकों का पीछा कर रही है। जयपुर के आमेर में रविवार को नौ साल की बच्ची की हत्या हो गई, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को यह पता ही नहीं था। मीडिया ने सवाल पूछा तो वह नमस्कार करके चले गए। जनता यह सारी चीजें देख रही है। पुलिस का इस्तेमाल विधायकों की निगरानी के लिए किया जा रहा है।
विधायकों की नाराजगी के मायने क्या हैं?
सरकार के साथ बसपा, बीटीपी या जो निर्दलीय विधायक हैं, वह अपनी मांगें पूरी कराने के लिए मौके का फायदा उठा रहे हैं। कांग्रेस की दिव्या मदेरणा, ममता भूपेश सहित कई विधायकों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ काम नहीं होने को लेकर नाराजगी जताई थी। अब राज्यसभा चुनाव का मौका देखकर विधायक मुख्यमंत्री गहलोत से नेगोशिएशन कर रहे हैं। इससे लोगों की नजर में सीएम की छवि नेगेटिव बन रही है। शायद तीन सीटे जीतकर सीएम गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सामने नबंर बना ले जाएं, लेकिन विधानसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा।
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अविनाश कल्ला
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कांग्रेस कितनी राज्यसभा सीट जीत रही?
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अविनाश कल्ला कहते हैं, जिस तरह से अशोक गहलोत ने राजस्थान (राज्यसभा चुनाव को लेकर) में अपनी पकड़ बना रखी है उससे दूसरी सीट के लिए भाजपा की राह आसान नहीं है। जिस तरह से दो दिन में उन्होंने चीजें कंट्रोल की हैं, उसे लग रहा कि नतीजा तीन एक का ही होगा। राज्यसभा चुनाव में अभी चार दिन हैं। ऐसे में कुछ नाराज चल रहे विधायकों के पास अपनी मांगें पूरी कराने का आखिरी मौका है। सरकार जिस तरह से अधिकारियों के ट्रांसफर कर रही है, कुछ काम भी शुरू किए गए हैं। इससे साफ है कि विधायक जितनी नाराजगी जाहिर करेंगे उतने ही उनके काम होंगे।
गहलोत के हाथ से कांग्रेस खाते की तीसरी सीट निकली तो क्या परिवर्तन होगा?
यह सिर्फ अटकले हैं, एक नए मुख्यमंत्री को सिस्टम समझकर चीजें अपने तरीके से सेट करने में काफी समय निकल जाएगा और तब तक विधानसभा चुनाव करीब आ जाएगा। कांग्रेस ने पंजाब में सीएम बदलकर जो प्रयोग किया वह पूरी तरह से गलत साबित हुआ। अगर, कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम पद से नहीं हटाया जाता तो वहां सरकार रिपीट हो सकती थी। इसे देखते हुए राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस आलाकमान किसी तरह का फेरबदल नहीं करना चाहेगा।
कौन-कौन से विधायक बाड़ेबंदी में नहीं पहुंचे
बहरोड़ से निर्दलीय विधायक बलजीत यादव बाड़ेबंदी में जाने को तैयार नहीं हैं। बीटीपी (भारतीय ट्राइबल पार्टी) के दो विधायक राजकुमार रोत और रामप्रसाद डिंडोर ने भी समर्थन देने के बदले सीएम गहलोत के सामने कई शर्तें रख दी हैं। इसके अलावा ओसियां से कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा, खेरवाड़ा विधायक दयाराम परमार, श्रीमाधोपुर विधायक दीपेंद्र सिंह शेखावत और जैसलमेर से विधायक रूपाराम मेघवाल बाड़ेबंदी में शामिल होने उदयपुर ताज अरावली होटल में नहीं पहुंचे हैं। हालांकि, इनमें से दो विधायकों की तबीयत खराब बताई जा रही है।
राजस्थान में क्या हैं समीकरण?
राजस्थान में चार राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। कांग्रेस ने तीन और भाजपा ने एक उम्मीदवार उतारा है। घनश्याम तिवाड़ी भाजपा के उम्मीदवार हैं। प्रमोद तिवारी, मुकुल वासनिक और रणदीप सुरजेवाला को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है। इनके अलावा हरियाणा से निर्दलीय सांसद सुभाष चंद्रा इस बार भाजपा के समर्थन से राजस्थान में किस्मत आजमाएंगे। चंद्रा का कार्यकाल दो अगस्त को पूरा हो रहा है।
क्या होगा गणित?
चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार उतरने से चुनाव यहां चुनाव होंगे। 200 सीटों वाली राजस्थान विधानसभा में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 वोट की जरूरत होगी। मौजूदा सदन में कांग्रेस के 108, भाजपा के 71 विधायक हैं। संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस के दो और भाजपा का एक उम्मीदवार आसानी से जीत जाएगा। चौथी सीट के लिए दोनों पार्टियों को दूसरे दलों के विधायकों की जरूरत पड़ेगी। कांग्रेस को अपने 108 विधायकों के अलावा रालोद के एक और माकपा के दो विधायकों का वोट मिलना तय माना जा रहा है। ऐसे में उसे अपने तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए 14 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। वहीं, भाजपा के समर्थन से निर्दलीय पर्चा भरने वाले सुभाष चंद्रा को जीत के लिए आठ अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। उन्हें भाजपा 30 विधायकों के अलावा हनुमान बेनीवाल के तीन विधायकों का समर्थन मिलना तय माना जा रहा है। ऐसे में निर्दलीय और बीटीपी के विधायकों का वोट किसी भी उम्मीदवार के लिए निर्णायक होगा। समर्थन जुटाने के लिए राजस्थान में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स भी शुरू हो चुकी है।