राजसमंद जिले के 73 जनजातीय गांवों में “धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान” के तहत सरकारी योजनाओं की शत-प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष अभियान शुरू किया है। जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा ने बताया कि प्रशासन अब गांव-गांव जाकर पात्र परिवारों को योजनाओं का लाभ दिलाएगा।
राजसमंद जिले के जनजातीय क्षेत्रों में अब सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। “धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान” के तहत जिला प्रशासन ने विशेष पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी आदिवासी परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे। इस अभियान के जरिए जिले के 73 जनजातीय गांवों में योजनाओं की शत-प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।
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गांव-गांव पहुंचकर मिलेगा योजनाओं का लाभ
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा ने अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जिला प्रशासन खुद गांवों तक पहुंचकर पात्र परिवारों को योजनाओं का लाभ दिलाएगा।
“आदि कर्मयोगी” करेंगे लोगों की मदद
अभियान को सफल बनाने के लिए “आदि कर्मयोगी” तैनात किए गए हैं। ये कर्मयोगी गांवों में जाकर लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे और पात्र लोगों को योजनाओं से जोड़ने का काम करेंगे।
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कई योजनाओं का मिलेगा सीधा फायदा
धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत कौशल विकास, रोजगार, बिजली, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, महिला एवं बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ जनजातीय परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन का प्रयास है कि हर जरूरतमंद परिवार तक सरकारी सुविधाएं पहुंचे।
21 से 23 मई तक लगेंगे जनसुनवाई शिविर
अभियान के तहत 21 से 23 मई तक जनजातीय गांवों में विशेष जनसुनवाई शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में ग्रामीणों की समस्याएं सुनी जाएंगी और मौके पर ही समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।
अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं की पहुंच का दावा
जिला प्रशासन का कहना है कि यह अभियान जनजातीय क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने की बड़ी पहल साबित होगा। प्रशासन का दावा है कि अभियान के जरिए अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाएगा। जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा ने प्रेस वार्ता के दौरान धरती आबा अभियान की विस्तृत जानकारी दी और इसे जनजातीय क्षेत्रों के विकास की दिशा में अहम कदम बताया।