धौलपुर ज़िले में गुरुवार-शुक्रवार की आधी रात से बारिश का दौर शुरू हो गया है। लगभग ढाई बजे से शुरू हुई बारिश का दौर रुक रुक कर चल रहा है। लंबे इंतजार के बाद हुई बारिश ने किसानों को बड़ी राहत दी है। खरीफ की मुरझाई हुई फसल में जान लौट कर आ गई है।
बारिश से आमजन को उमस भरी गर्मी से निजात भी मिली है। मौजूदा वक्त में आसमान में बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग पूर्वी राजस्थान में बारिश के संकेत दे रहा है।
मानसूनी सीजन में विगत 20 दिनों से बारिश नहीं होने से किसानों के चेहरों पर लकीरें खींच रही थीं। उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेहाल किया था। बाजरा दलहन तिलहन ज्वार और ग्वार की फसल बरसात के अभाव में सूखने के कगार पर पहुंच रही थी। फसल मोबाइल के बाद लंबा समय गुजर गया था। जिले का किसान बेसब्री से मानसूनी बारिश का इंतजार कर रहा था।
मौसम विभाग विगत कई दिनों से बारिश की चेतावनी भी दे रहा था। आसमान में बरसाती बादल बन रहे थे, लेकिन बरसे नहीं, जिले का किसान काफी परेशानी के दौर से गुजर रहा था। खरीफ फसल की बुवाई कर निराई गुड़ाई तक कर चुका था। पानी के अभाव में पौधे सूखने के कगार पर पहुंच चुके थे। किसान विनीत कुमार शर्मा ने बताया मध्य रात्रि से बरसात का दौर शुरू हुआ है। बरसात का होना किसान के लिए शुभ संकेत है। लंबे इंतजार के बाद हुई बारिश से काश्तकारों को बड़ी राहत मिली है।
खरीफ की सभी फसलों में इस बरसात से फायदा हुआ है। बाजरा की फसल पर अधिक संकट दिखाई दे रहे थे। लेकिन मध्यरात्रि से हुई बारिश ने बाजरे की मुरझाई हुई फसल को खेतों में फिर से खड़ा कर दिया है। उन्होंने बताया बरसात के बाद किसान निश्चित तौर पर फर्टिलाइजर उपयोग करेगा। खाद यूरिया देने से फसल पकाव की स्थिति तक पहुंच जाएगी। किसान सुनील कुमार ने बताया काश्तकारों के लिए बरसात अमृत बनकर बरसी है। खरीफ फसल में इससे बहुत लाभ हुआ है। इसके साथ उमस भरी गर्मी से लोगों को बड़ी निजात मिली है। हालांकि अभी और बारिश की किसान को जरूरत है।
पूर्वी राजस्थान में मानसून सक्रिय
मौसम विभाग से मिली जानकारी में पूर्वी राजस्थान में मानसून सक्रिय है। अगस्त के महीने में अच्छी बारिश की संभावना दिखाई दे रही है। मानसून का दबाव अच्छा बन रहा है। आगामी एक से दो दिनों में भारी बारिश की भी संभावना दिखाई दे रही थी।
बांध अभी भी खाली
जिले के अधिकांश बांध अभी खाली है। बरसात नहीं होने से बांध एवं तालाबों में पानी की आवक नहीं हो सकती है। पार्वती बांध, उर्मिला, सागर बांध, राम सागर बांध, तालाब शाई बांध अभी तक पूरी तरह से नहीं भरे हैं। बांधों का नहीं भरना किसानों के लिए चिंता का संकेत है।