सचिन पायलट, गिरिजा व्यास, सी.पी. जोशी जैसे कांग्रेस के दिग्गजों के बाद अब मोहम्मद अजहरुद्दीन, केन्द्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा व जितेन्द्र सिंह पर नजरें गढ़ गई हैं।
अजहर टोंक-सवाईमाधओपुर सीट से, तो केन्द्रीय राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह अलवर सीट से भाग्य आजमा रहे हैं। दोनों के सामने भाजपा की टिकट पर लडऩेवाले उम्मीदवार भले ही दिग्गज नेता नहीं हैं, लेकिन वे राजनीति में नए भी नहीं हैं।
राजस्थान में बची पांच सीटों में से तीन सीटों को हॉट कहा जा सकता है। योग गुरू बाबा रामदेव की सिफारिश पर भाजपा ने महंत चांदनाथ को कांग्रेस के जितेन्द्र सिंह के सामने टिकट दिया। दौसा सीट से कांग्रेस ने केन्द्रीय मंत्री नमो नारायण मीणा को टिकट दिया, तो भाजपा ने उनके भाई पूर्व डीजीपी हरीश मीणा को उतार दिया। दोनों भाइयों की चुनावी लड़ाई का फायदा उठाने की मंशा से राजपा से विधायक किरोड़ी लाल मीणा ने भी ताल ठोक दी।
अजहर ने बैटिंग के लिए नमो को करवाया आउट
क्रिकेटर अजहरूद्दीन राजनीति में अनुभवी केन्द्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा पर भारी पड़े और उनका टिकट कटवा कर टोंक-सवाईमाधोपुर सीट से चुनाव मैदान में कूद पड़े।
राजनीति पर क्रिकेट की चकाचौंध टिकट के मामले में भारी पड़ गई तथा चुनाव में इसकी परीक्षा होनी बाकी है। उत्तर प्रदेश में मुराबाद से सांसद रहे अजहरूद्दीन अपनी पत्नी अभिनेत्री संगीता बिजलानी के ग्लेमर का भी सहारा ले रहे हैं।
वे लगातार उनके लिए प्रचार कर रही हैं। क्षेत्र में नए होने के कारण लोगों को जोडऩे का यह उनका अनूठा प्रयास है। भाजपा ने भी यहां से बाहरी उम्मीदवार सुखवीर सिंह जोनापुरिया को मैदान में उतारा है तथा राजपा ने भी राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे जगमोहन मीणा को खड़ा किया है।
क्षत्रिय का मुकाबला संत से
अलवर सीट से अलवर राजपरिवार से जुड़े केन्द्रीय राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह के सामने भाजपा ने अस्थल बोहर मठ रोहतक हरियाणा के महंत बाबा चांदनाथ को उतारा है।
बाबा चांदनाथ राजनीति में नए नहीं हैं तथा वह वर्ष 2008 में बहरोड से विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। इस बार उनका मुकाबला काफी कड़ा है।
जितेन्द्र सिंह यहां से एक बार सांसद व दो बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि वे आम मतदाता के व्यक्तिगत कार्य नहीं होने की नाराजगी झेल रहे हैं। चांदनाथ 2004 में अलवर से 8 हजार मतों से हारे और बाद में बहरोड़ से विधायक बने। वे बाहरी प्रत्याशी के आरोपों से जूझ रहे हैं।
भाइयों की लड़ाई में ढूंढ रहे हैं मलाई
नमोनारायण मीणा ने इस पर
दौसा से चुनाव लडऩे का मन बनाया, लेकिन इस बीच भाजपा ने उनके छोटे भाई हरीश
मीणा को मैदान में उतार दिया।
नमोनारायण ने कांग्रेस आलाकमान पर भाई के
सामने ही लडऩे का दबाव बनाया। कांग्रेस ने भाई से लडऩे के उनके प्रस्ताव को
मान लिया तब विधायक किरोडी लाल मीणा चुनाव में यह कह कर उतर गए कि यह
फिक्सिंग का मामला है।
अभी तक क्रिकेट में यह शब्द ज्यादा चर्चित था जो
राजनीति में भी सुनाई देने लगा है। किरोड़ी लाल मीणा ने इस सीट से वर्ष
2009 में निर्दलीय के रूप में लोकसभा चुनाव जीता था।