राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को दावा किया कि पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट शुरुआत से ही उनकी सरकार को गिराने के लिए षड्यंत्र रच रहे थे। इसके अलावा गहलोत ने कहा कि हम दोनों के बीच पिछले डेढ़ साल से बातचीत नहीं हो रही थी। लेकिन सीएम ने कहा कि अगर वह वापस आते हैं, तो उन्हें फिर से गले लगा लूंगा।
पायलट के मुद्दे पर एक निजी टीवी चैनल से बात करते हुए सीएम गहलोत ने कहा कि एक मंत्री अपने मुख्यमंत्री से बात नहीं करता है, ना ही उसकी सलाह लेता है और दोनों के बीच कोई संवाद नहीं है। लोकतंत्र में, एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी भी बात करते हैं। लोकतंत्र की खूबसूरती ही संवाद है। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल में जितनी खबरें सामने आईं, वो एक पूरी किताब लिखने के लिए पर्याप्त है।
उन्होंने दावा किया कि पायलट पीड़ित होने का दावा कर रहे हैं और उन्होंने अनावश्यक रूप से राज्य 'विशेष अभियान समूह' (एसओजी) को एक मुद्दा बना दिया है। गहलोत ने कहा कि 10-12 विधायकों को नोटिस जारी किए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी पार्टी ने एसओजी से शिकायत की कि भाजपा सरकार को गिराने की साजिश रच रही है। हमने उनका (सचिन पायलट) नाम नहीं लिया था, लेकिन वह स्पष्ट रूप से ऐसा कर रहे थे।
यह भी पढ़ें: कांग्रेस में रहकर लंबी लड़ाई लड़ना चाहते हैं सचिन पायलट, प्लान-बी पर कर रहे हैं काम!
उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव के दौरान, मुझे विधायकों को एक होटल में ले जाना पड़ा और 10 दिनों तक वहां उन्हें रखना पड़ा। मुझे इसका बुरा लगा। तब यह आरोप लगाया गया था कि मैंने उपमुख्यमंत्री को बुरा दिखाने के लिए ऐसा किया था, जबकि ऐसा नहीं है।
जब गहलोत से पूछा गया कि पायलट को मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया गया, तो उन्होंने कहा कि इसका निर्णय हाई कमान के पास है। गहलोत ने कहा कि ज्यादातर विधायक मेरे पक्ष में थे और अन्य राज्यों की तुलना में राजस्थान की स्थिति अलग थी। राजस्थान में जनता मुझे सीएम के रूप में चाहती थी।
राजस्थान के वर्तमान संकट को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि एक बार जब आप अति-महत्वाकांक्षी हो जाते हैं, तो आपके सोचने की क्षमता गायब हो जाती है। उन्होंने आगे कहा कि अगर वह (सचिन पायलट) वापस आते हैं, तो मैं उन्हें गले लगा लूंगा।