साईं बाबा की पूजा करने वालों के लिए स्वरूपानन्द सरस्वती की ओर से दिए गए विवादित बयानों की जांच अब राजस्थान पुलिस करेगी। अगर ये बयान धार्मिक भावना भड़काने वाले पाए गए तो उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।
जयपुर की निचली अदालत ने परिवादी अशोक कुमार के परिवाद की सुनवाई के बाद वैशाली नगर थाना पुलिस को सोमवार को ये निर्देश दिए।
अशोक कुमार ने परिवाद दायर किया था कि स्वरूपानन्द ने साईं बाबा के भक्तों पर टिप्पणी करके हिन्दुओं को बांटने का प्रयास किया है। उनके अनुसार हिन्दुओं को धर्म के आधार पर बांटने का प्रयास देश को बांटने जैसा है।
निचली अदालत ने जयपुर के थाने को दिए निर्देश
कुछ दिनों पहले स्वरूपानंद सरस्वती ने यह कहकर विवाद पैदा कर दिया था कि साईं बाबा की पूजा करना गलत है।
उन्होंने साईं बाबा को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक मानने से भी इनकार किया था। उन्होंने कहा था, "अगर ऐसा होता तो साईं बाबा को मुसलमान भी मानते, लेकिन उन्हें केवल हिंदू ही मानते हैं।"
सरस्वती ने कहा था, "साईं बाबा न भगवान हैं और न ही गुरु। उनकी पूजा हिंदू धर्म को बांटने की साजिश है।" उन्होंने यह भी कहा था, "साईं बाबा के नाम पर कमाई की जा रही है। सनातन धर्म में भगवान विष्णु के 24 अवतार माने जाते हैं। कलयुग में बुद्ध और कल्कि के अलावा किसी अवतार की चर्चा नहीं है। इसलिए, साईं अवतार नहीं हो सकते।"