भारत सरकार ने रेलवे स्टेशनों पर आने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से अमृत भारत योजना मिशन के तहत विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त निर्माण कार्य स्वीकृत किए हैं। इन निर्माण कार्यों में नियम अनुसार टेंडर प्रक्रिया अपनाते हुए विभिन्न संवेदकों को इनका जिम्मा दिया गया है, जिसके अनुरूप उन्होंने निर्माण कार्य भी शुरू कर दिए हैं। इन निर्माण कार्यों में संवेदकों के अलावा रेलवे के विभिन्न अधिकारी और कर्मचारी भी इन निर्माण कार्यों की देखरेख के लिए नियुक्त किए गए हैं ।
इतने इंतजाम के बावजूद निर्माण कार्यों में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप सामने आ रहे हैं, जिनसे अनगिनत यात्रियों का जीवन संकट में पड़ सकता है। दौसा जिले के बांदीकुई रेलवे जंक्शन पर भी करीब 9 करोड़ रुपए के निर्माण कार्य होना हैं लेकिन अपने आप को लेबर ठेकेदार बता रहे दुलीचंद बैरवा ने निर्माण कार्यों में हो रही बड़ी धांधली के संकेत दिए हैं।
तथाकथित ठेकेदार दुलीचंद बैरवा का कहना है कि बांदीकुई रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य की जिम्मेदारी जिस फर्म को मिली है, उसने किसी दूसरी फर्म को निर्माण का ठेका दे दिया है। यही नहीं इस दूसरी निर्माण फर्म ने उसे मजदूरी का ठेका दे दिया है। बैरवा कहना है कि मैंने नियम अनुसार फर्म से तयशुदा मजदूरी के एग्रीमेंट के साथ मजदूर लगाकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया था लेकिन निर्माण कार्य डीपीसी स्तर तक पहुंचा तो संबंधित ठेकेदार ने डीपीसी के बंधे हुए लोहे के जाल में ही गड़बड़ी कर दी और फिर मिलीभगत का खेल शुरू हो गया।
दुलीचंद ने बताया कि विरोध करने पर बांदीकुई में काम देख रहे विजय मल्होत्रा नाम के व्यक्ति ने पहले तो उसे डराया-धमकाया और फिर बड़ा काम दिलाने का झांसा देकर उसको चुप करने का प्रयास किया। दुलीचंद का कहना है कि मैं निजी स्वार्थ के चलते लाखों आदमियों की जान के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता इसलिए मैंने इस कार्य की मौखिक शिकायत भी की है लेकिन इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
अपने आप को लेबरों का ठेकेदार बता रहे दुलीचंद बैरवा द्वारा लगाए इन आरोपों में कितनी सच्चाई है यह बात तो अब रेलवे के जिम्मेदारों की जांच के बाद ही सामने आएगी।