राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस नेता सचिन पायलट को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि सचिन पायलट उनके लिए बेटे जैसे हैं। उन्होंने कहा कि पायलट के साथ उनके रिश्तों को लेकर उन्होंने जो भी बात कही, वह दिल से कही थी और उसमें किसी तरह की दुर्भावना नहीं थी।
जयपुर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने कहा कि सचिन पायलट का यह कहना बिल्कुल सही है कि वे उन्हें अपने बेटे वैभव गहलोत की तरह मानते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों परिवारों के बीच वर्षों पुराने संबंध हैं और बचपन से ही एक-दूसरे के घर आना-जाना रहा है। गहलोत ने कहा कि हाल ही में उन्होंने जो बयान दिए थे, उनका उद्देश्य केवल तथ्यों को सामने रखना था। उन्होंने कहा कि यह धारणा बनाई गई थी कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष का पद स्वीकार नहीं किया, जबकि वास्तविकता कुछ और थी। उन्होंने पार्टी नेताओं से पुराने मतभेद भुलाकर कांग्रेस के हित में एकजुट होकर काम करने की अपील की।
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इस दौरान गहलोत ने बीकानेर और कोटा में प्रसूताओं की मौत और स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से महिलाओं में भय का माहौल बना है। सरकार को गंभीरता से जांच करानी चाहिए, पीड़ित परिवारों को राहत देनी चाहिए और जनता का भरोसा बहाल करना चाहिए। मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज होने के मामले पर गहलोत ने लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रियाओं में गड़बड़ियां और मतदाता सूचियों में हेरफेर जैसी घटनाएं लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय हैं।
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत द्वारा कांग्रेस से अलग हुए दलों को फिर एकजुट करने के सुझाव पर गहलोत ने कहा कि इस विचार में दम है। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों की एकजुटता की आवश्यकता बताई।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों के प्रचार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने राहुल गांधी को ईमानदार, प्रतिबद्ध और गरीबों के प्रति समर्पित नेता बताते हुए कहा कि देश में उनके नेतृत्व को लगातार स्वीकार्यता मिल रही है। राजस्थान सरकार में मंत्री किरोड़ीलाल मीणा द्वारा की जा रही छापेमारी को लेकर भी गहलोत ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री का स्वयं छापेमारी करना उचित नहीं है। ऐसे कार्य अधिकारियों को करने चाहिए और मंत्रियों की भूमिका निगरानी और कार्रवाई सुनिश्चित करने तक सीमित रहनी चाहिए।