डॉ.अर्चना शर्मा आत्महत्या केस में एक नया मोड़ आ गया है। आरोपी के रूप में गिरफ्तार किए गए भाजपा नेता जितेंद्र गोठवाल ने जेल से रिहा होने के बाद डॉ. अर्चना की आत्महत्या की सीबीआई जांच की मांग की है। गोठवाल ने सोमवार को बीजेपी मुख्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित की उन्होंने डॉ. अर्चना शर्मा की आत्महत्या की सीबीआई जांच की मांग के साथ ही गहलोत सरकार पर उन्हें फंसाने का आरोप लगाया।
क्या है मामला
आशा बैरवा नाम की एक गर्भवती महिला डॉ. अर्चना शर्मा के अस्पताल आनंद हॉस्पिटल में प्रसव के लिए गई थी। प्रसव के दौरान आशा बैरवा की 28 मार्च को मौत हो गई थी। महिला की मौत के बाद उसके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए 302 के तहत मामला दर्ज कराया था। मामला दर्ज कराने के एक दिन बाद 29 मई को डॉ. अर्चना शर्मा ने अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी थी। डॉ. अर्चना के पति सुनीत ने प्रशासन के द्वारा डाले जा रहे दबाव को आत्महत्या का कारण बताया था। मामले में पुलिस ने बीजेपी नेता जितेंद्र गोठवाल समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बीजेपी नेता जितेंद्र गोठवाल की गिरफ्तारी 31 मार्च और मुख्य आरोपी बल्या जोशी को 28 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। हाल ही में अदालत ने धरना प्रदर्शन और घेराव को आत्महत्या की वजह मानने से इनकार करते हुए बीजेपी नेता गोठवाल, मुख्य आरोपी बल्या जोशी समेत 6 आरोपियों को 18 मई को जमानत पर रिहा कर दिया। आत्महत्या के चार आरोपी फिलहाल जेल में हैं।
बीजेपी नेता गोठवाल ने बताया घटनाक्रम
18 मई को जेल से रिहा हुए बीजेपी नेता जितेन्द्र गोठवाल सोमवार को बीजेपी मुख्यालय में मीडिया से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने 28 मार्च को आशा बैरव की मौत और धरना प्रदर्शन की जानकारी साझा की। बीजेपी नेता ने बताया कि आशा बैरवा की मौत 28 मार्च 2022 को दोपहर 12 बजे डिलिवरी के दौरान हो गई थी, मौत के बाद परिजन मुआवजे की मांग को लेकर 2 बजे धरना देने लगे। शाम 6:50 बजे पुलिस ने डॉ. अर्चना शर्मा के खिलाफ धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया था। घटना की जानकारी लगने के बाद बीजेपी नेता जितेन्द्र गोठवाल 28 मार्च को रात करीब 11:30 बजे घटनास्थल पर पहुंचे और 1 घंटे वहां रुकने के बाद तहसीलदार और पटवारी के माध्यम से सरकारी योजनाओं सहित 10 लाख रुपये मुआवजा पीड़ितों को देने की बात पर सहमति बनी। मुआवजे की बात पूरी होने के बाद गोठवाल अस्पताल से सवाई माधोपुर के लिए निकल गए। अगले दिन 29 मार्च को उन्हें डॉ. अर्चना शर्मा के सुसाइड की जानकारी मिली। उन्हें यह भी पता चला कि कांग्रेस मंत्री प्रसादीलाल मीणा, डॉ. अर्चना शर्मा और उनके परिवार पर दबाव डाल रहे थे। वहीं कांग्रेस मंत्री ने मृतक परिवार पर भी दबाव बनाया और मंत्री के नजदीकी लोगों ने पीड़ित परिवार के लिए समझौता पत्र तैयार करवाकर अर्चना शर्मा से 3 लाख रुपये की राशि दी आशा बैरवा के परिजनों को दिलाई।
आशा बैरवा के परिजनों से 3 लाख रुपये हुए बरामद
पुलिस के अनुसार आशा बैरवा के परिजनों के पास से 3 लाख रुपये बरामद हुए, जो कांग्रेस मंत्री ने समझौते में दिए गए थे, जबकि प्रदर्शन-धरना करने वाले लोगों ने मुआवजा सरकार से मांगा था, डॉ. अर्चना से नहीं। इस मामले में 28 मार्च को शाम 6:50 बजे एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें लालू राम बैरवा, आरोपी सुनीत उपाध्याय और 1 अन्य व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
डॉ. अर्चना पर लगा था लापरवाही का आरोप
पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार लालू राम की पत्नी आशा देवी गर्भवती थी, जिसको मातृ शिशु केंद्र कल्याण में दिखाया गया, जिसे डॉ. ने दौसा के सरकारी हॉस्पिटल में रैफर कर दिया। लालू राम ने आनंद हॉस्पिटल के डॉ. सुनीत और डॉ. अर्चना से बात की और जानकारी ली। दोनों ने गर्भवती महिला को अस्पताल लाने और सुरक्षित प्रसव कराने की बात कही। आशा बैरवा का पति लालू राम निजी एम्बुलेंस में अपनी पत्नी को लेकर आनंद हॉस्पिटल पहुंचा। FIR में डॉ. की लापरवाही से जच्चा की जान जाने और बिना जानकारी के जच्चा को मौत के बाद निजी एम्बुलेंस से नवजात समेत घर छोड़ने की बात का जिक्र किया गया है। वहीं, FIR में यह भी लिखा है कि इस घटनाक्रम के दौरान आशा का पति लालू राम बेहोश था। प्रसूता आशा की मौत दोपहर 12 बजे के करीब हुई थी वहीं डॉ. अर्चना के खिलाफ 28 मार्च शाम को 6:50 यह रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। बीजेपी नेता 28 मार्च को घटना की जानकारी होने के बाद रात करीब 11:30 बजे घटना स्थल पर पहुंचे थे।
ऐफिडेविड में लालू राम ने अस्पताल पर लापरवाही के आरोप से इनकार किया
प्रेस वार्ता के दौरान बीजेपी नेता गोठवाल ने एक ऐफिडेविट भी प्रस्तुत किया, जो कि 29 मार्च 2022 का है। ऐफिडेविट के अनुसार लालू राम बैरवा ने स्वीकार किया कि उसकी पत्नी आशा देवी के इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई है और साथ ही ये भी लिखा हुआ है कि कुछ लोगों के बहकावे में आकर उसने धरना प्रदर्शन और हॉस्पिटल पर आरोप लगाए थे, इसके लिए उसने माफी भी मांगी है और आनंद हॉस्पिटल पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई न चाहने की बात का जिक्र किया है। लालू राम बैरवा ने यह भी कहा है कि वह भविष्य में भी कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। इस ऐफिडेविट में सात लोगों के नाम लिखे हैं।
दोनों पक्षों में सुलह के बाद डॉ. अर्चना ने क्यों किया सुसाइड
आशा बैरवा की मौत के बाद पति लालू राम बैरवा और डॉ. अर्चना शर्मा में सुलह होने के बाद भी डॉ.अर्चना शर्मा ने 29 मार्च को आत्महत्या क्यों की यह गुत्थी फिलहाल सुलझ नहीं रही है। डॉ. अर्चना शर्मा की मौत के बाद उनके पति डॉ. सुनीत उपाध्याय ने 29 मार्च की शाम को करीब 5:31 बजे शिवशंकर उर्फ बल्या जोशी के खिलाफ मामला दर्ज कराया। सुनीत उपाध्याय ने जानकारी दी कि सुबह 11:30 बजे उनकी पत्नी अर्चना शर्मा जो कि एक एमबीबीएस MD थी, ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, जिसका कारण एक दिन पहले आनंद हॉस्पिटल में एक मरीज़ की मौत के बाद कुछ लोगों ने हॉस्पिटल का घेराव किया और हत्या का मुकदमा दर्ज करने का प्रशासन पर दबाव बनाया था।
बल्या जोशी आत्महत्या मामले का मुख्य आरोपी है
डॉ. अर्चना शर्मा आत्महत्या केस में मुख्य आरोपी शिव शंकर बल्या जोशी का नाम शामिल है। FIR में यह भी बताया गया कि स्थानीय नेता बल्या जोशी पहले भी कई बार हॉस्पिटल में आकर धमकाया करता था, बार-बार रिपोर्ट के बाद भी पुलिस ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण आरोपी के हौसले बढ़ते गए। बल्या जोशी सुनीत उपाध्याय के पिता के साथ भी गाली गलौच करता रहा था। यह सब डॉ. अर्चना शर्मा सहन नहीं कर पायी और आत्महत्या कर ली। FIR में एक पत्रकार का भी जिक्र किया गया है। पत्रकार पर दलाली के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है। डॉ. अर्चना शर्मा की मौत के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी बल्या जोशी को 28 अप्रैल को गिरफ्तार किया था।
इन्हें मिली जमानत
अर्चना शर्मा आत्महत्या केस में फिलहाल कोर्ट ने जितेंद्र गोठवाल, शिव शंकर जोशी उर्फ बल्या जोशी, हरकेश मटलाना, एनएसयूआई के नेता हरकेश शाहपुरा के अलावा बाबूलाल मीणा और राम मनोहर को जमानत पर रिहा कर दिया है।