सार
डीग पुलिस ने ‘ऑपरेशन काउंटडाउन’ के तहत सात साइबर ठगों को गिरफ्तार किया। आरोपी सेना का जवान बनकर, पिस्टल और पुराने सिक्के बेचने का झांसा देकर ठगी करते थे। पुलिस ने नौ फर्जी सिम, सात मोबाइल जब्त किए और चार लाख रुपये की ठगी का डेटा मिला।
राजस्थान के डीग जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन काउंटडाउन’ के तहत पुलिस ने सात साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से सात एंड्रॉइड मोबाइल फोन और नौ फर्जी सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में मोबाइल फोन से करीब चार लाख रुपये की साइबर ठगी का डेटा सामने आया है। आरोपी ऑनलाइन हथियार बेचने, पुराने सिक्के-नोट खरीदने और सेना का जवान बनकर लोगों से ठगी करते थे।
कच्चे रास्ते पर छापेमारी कर पांच आरोपी पकड़े
पुलिस के अनुसार, देर रात गश्त के दौरान मुखबिर से साइबर ठगी की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस ने मल्हाका रोड से भैसेड़ा और पहाड़ी की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते पर छापेमारी की। मौके पर मोबाइल के जरिए ऑनलाइन ठगी कर रहे साहिन, आरिफ, समीम, साहिल और साजिद को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच है। ये सभी पहाड़ी थाना क्षेत्र और हरियाणा के फिरोजपुर झिरका क्षेत्र के रहने वाले हैं। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से पांच एंड्रॉइड मोबाइल फोन और सात फर्जी सिम कार्ड बरामद किए गए। पुलिस ने पहाड़ी थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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पिस्टल और पुराने सिक्कों के नाम पर ठगी
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी इंटरनेट पर हथियार और पिस्टल बेचने तथा उनकी होम डिलीवरी का झांसा देते थे। इसके अलावा पुराने सिक्के और नोट ऊंचे दामों में खरीदने का लालच देकर भी लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। आरोपी फर्जी सिम कार्ड और मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर लोगों से रकम ऐंठते थे।
सेना का जवान बनकर सामान खरीदने के नाम पर ठगी
दूसरी कार्रवाई खोह थाना पुलिस ने की। पुलिस ने सेना का जवान बनकर ऑनलाइन सामान खरीदने के नाम पर ठगी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से दो एंड्रॉइड मोबाइल फोन बरामद किए गए। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने गंडवास से भयाड़ी बांध की ओर जाने वाले रास्ते के पास दोनों आरोपियों को मोबाइल के जरिए ठगी करते हुए पकड़ा। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे खुद को सैन्यकर्मी बताकर ऑनलाइन सामान बुक कराते थे। शुरुआत में वे पीड़ित से क्यूआर कोड के जरिए एक रुपया डलवाते और फिर दो रुपये वापस भेजते थे। इससे पीड़ित का भरोसा जीतने के बाद वे सामान के बिल का भुगतान करवाकर रकम हड़प लेते थे। इस मामले में खोह थाने में प्रकरण दर्ज किया गया है।