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Chittorgarh Lok Sabha: कौन चढ़ेगा चित्तौड़ का दुर्ग? दो बार के सांसद सीपी जोशी के लिए भितरघात बड़ी चुनौती

Sat, 13 Apr 2024 01:49 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़

सार

Chittorgarh Lok Sabha: लोकसभा चुनाव के लिए राजस्थान में चित्तौड़गढ़ सीट चर्चाओं में भले नहीं है लेकिन, इसका मतलब यह कतई नहीं कि भाजपा के लिए यहां राह आसान है। पिछले दो बार से यहां से बने भाजपा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी क्या चित्तौड़ के दुर्ग को अजेय रख पाएंगे...? 
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कौन चढ़ेगा चित्तौड़ का दुर्ग? - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Chittorgarh Lok Sabha: राजस्थान में इस बार लोकसभा चुनाव चौंकाने वाले हो सकते हैं। पिछले दो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का यहां खाता नहीं खुला लेकिन, इस बार यहां ऐसी कई सीटें हैं जिनसे कांग्रेस को काफी उम्मीदे हैं। टफ फाइट वाली सीटों में अब तक बाड़मेर, जोधपुर, करौली-धौलपुर, भरतपुर, दौसा, टोंक सवाई माधोपुर, चूरू, झुंझुनू की चर्चाएं हो रही हैं। लेकिन, इनके अलावा चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट भी इस बार चौंकाने वाले नतीजे दे सकती है। 

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यहां भाजपा में एंटी लॉबी का बहुत बड़ा असर देखने को मिल सकता है। यह सीट चंद्रभान आक्या, गुलाबचंद कटारिया और वसुंधरा राजे के प्रभाव वाली है। भाजपा ने यहां प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी को चुनावी मैदान में उतारा है जो पिछले दो चुनाव से लगातार जीत रहे हैं। वहीं, कांग्रेस ने अपने पूर्व मंत्री और 1998 में चित्तौड़गढ़ से सांसद रह चुके उदयलाल आंजना को चुनावी रण में भेजा है। 
 
प्रत्याशियों की तुलना की जाए तो इस सीट पर भाजपा का पलड़ा भारी हो सकता है, क्योंकि सीपी जोशी लगातार 2 बार यहां से चुनाव जीत रहे हैं। लेकिन, इस बार चुनाव कई मोर्चों पर लड़ा जा रहा है। विधानसभा चुनाव में चित्तौड़गढ़ लोकसभा में आने वाली 8 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 6 पर जीत दर्ज की थी। वहीं, एक पर कांग्रेस और एक पर भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़े चंद्रभान सिंह आक्या जीते थे। 

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मावली: भाजपा से बागी कुलदीप सिंह चूंडावत का प्रभाव
मावली विधानसभा सीट पर कांग्रेस के पुष्करलाल डांगी जीते। उन्हें 77686 वोट मिले, जबकि भाजपा के कृष्ण गोपाल पालीवार को 76129 वोट मिले। लेकिन, इस सीट पर आरएलपी के कुलदीप सिंह चूंडावत को भी 32521 वोट मिले जो एंटी जोशी खेमें में हैं। वहीं, यहां कांग्रेस के पुष्कर लाल डांगी पायलट समर्थक हैं। इसके अलावा यहां भारत आदिवासी पार्टी के समर्थकों की तादाद भी हजारों में है, जो इस बार कांग्रेस को सपोर्ट कर रही है।

वल्लभनगर: भिंडर की वापसी, पर भाजपा खुश नहीं 
विधानसभा चुनाव में यहां कांग्रेस की प्रीति शक्तावत को भाजपा के उदयलाल डांगी ने चुनाव हराया था। जीत का अंतर करीब 20 हजार वोट था। इसके अलावा यहां जनता सेना के रणवीर सिंह भिंडर भी चुनाव लड़े थे जिन्हें करीब 47 हजार वोट मिले थे। भिंडर वसुंधरा राजे के नजदीकी माने जाते हैं, सीपी जोशी ने लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में उनकी वापसी करवा दी। हालांकि, डांगी और भिंडर के बीच संबंध अच्छे नहीं है। डांगी समुदाय में पायलट के भी समर्थक हैं।

कपासन: यहां बेनीवाल का बड़ा असर
यह सीट विधानसभा चुनाव में भाजपा के पास रही, लेकिन यहां आरएलपी का बड़ा असर है। आरएलपी के आनंदी राम को करीब 30 हजार वोट मिले थे। इस बार हनुमान बेनीवाल कांग्रेस के अलायंस पर चुनाव लड़ रहे हैं। यहां मुस्लिम और धाकड़ वोट बड़ी संख्या में हैं जो इस समय एंटी जोशी खेमे में माने जा रहे हैं।
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चित्तौड़गढ़: आक्या से हाथ मिला पर दिल भी मिलेगा 
चित्तौड़गढ़ विधानसभा सीट पर सीपी जोशी के कहने पर चंद्रभान सिंह आक्या का टिकट कटा। इसके बाद आक्या निर्दलीय चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। हालांकि, लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने आक्या और जोशी की आदवत खत्म करने की कोशिश की है। लेकिन, नामांकन के दौरान सीपी जोशी ने मंच पर नरपत सिंह राजवी को भी बुलाया, जिन्होंने आक्या के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इसका मैसेज आक्या के समर्थकों के लिए ठीक नहीं गया।

निंबाहेड़ा: वसुंधरा राजे का प्रभाव  
इस सीट पर भाजपा के श्रीचंद कृपलानी चुनाव जीते हैं। लेकिन, उन पर वसुंधरा राजे की छाप है। वसुंधरा राजे सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। लेकिन, मौजूदा सरकार में उन्हें कोई पद नहीं मिला। ऐसे में कृपलानी इस सीट पर जोशी को कितना सपोर्ट करेंगे यह भी देखने वाली बात होगी।

बड़ी सादड़ी: कटारिया लॉबी और बीएपी का प्रभाव
लोकसभा चुनाव से पहले सीपी जोशी ने एंटी कटारिया लॉबी के रणधीर भिंडर और पूर्व जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह सामर को पार्टी में शामिल कर लिया। बड़ी सादड़ी सीट वैश्य वर्ग के प्रभुत्व वाली है और यहां कटारिया का खासा प्रभाव है। यहां के मौजूदा विधायक गौतम दक भी कटारिया के आदमी माने जाते हैं। इस सीट पर बीएपी का भी खासा प्रभाव है।
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