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राजस्थान हाईकोर्ट: 30 नवंबर तक रेट में सदस्य नियुक्त करें, वरना मुख्य सचिव को होना पड़ेगा पेश

Fri, 06 Nov 2026 08:57 AM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर

सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सिविल सेवा अपीलेट अधिकरण (रेट) की जोधपुर स्थायी पीठ में सदस्य की नियुक्ति के लिए सरकार को 30 नवंबर तक का समय दिया है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर मुख्य सचिव या कार्मिक विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को 3 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना होगा।
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राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सिविल सेवा अपीलेट अधिकरण (रेट) की जोधपुर स्थायी पीठ में सदस्य नियुक्त करने के लिए राज्य सरकार को 30 नवंबर तक का समय दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि यदि इस अवधि तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो राज्य के मुख्य सचिव या कार्मिक विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को 3 दिसंबर को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा।
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समयसीमा तय कर मांगी रिपोर्ट
वरिष्ठ न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनिल भंडारी, दिलीप सिंह उदावत, शीतल कुंभट और अरुण झांझरिया ने पैरवी की। उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि सदस्य की मृत्यु के बाद से जोधपुर पीठ में यह स्थान खाली है। हाईकोर्ट ने पूर्व में 5 अगस्त, 9 अगस्त और 17 सितंबर को भी राज्य सरकार को जल्द नियुक्ति के निर्देश दिए थे।
याचिकाकर्ता के अनुसार, सरकार की ओर से अब तक नियुक्ति के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। इसके कारण अधिकरण में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और पक्षकारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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उपभोक्ता आयोग से जुड़े नियम
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने कोर्ट को शीघ्र कार्रवाई करने का भरोसा दिया। उन्होंने राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के सेवा विस्तार से संबंधित नियमों का भी उल्लेख किया। इस पर खंडपीठ ने कहा कि उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को अधिकतम 65 वर्ष की आयु तक ही सेवा विस्तार दिया जा सकेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई लंबित है, उन्हें सेवा विस्तार देना राज्य सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होगा। सरकार इस संबंध में निर्णय लेने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र है।
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