राजस्थान हाईकोर्ट ने गुढ़ामालानी के अस्पताल के पीपीपी मॉडल पर किए गए एमओयू पर दोबारा विचार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने अस्पताल में पुरुषों द्वारा कराए जा रहे महिलाओं के प्रसव पर बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा, "यह बहुत शर्मनाक है, महिलाओं की भी मर्यादा होती है।"
हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में सोमवार को गुढ़ामालानी के अस्पताल के पीपीपी मोड पर किए गए एमओयू निरस्त करने के मामले में सुनवाई हुई। जब कोर्ट के सम्मुख यह जानकारी पेश की गई कि अस्पताल में पुरुष एएनएम महिलाओं की डिलीवरी करा रहे हैं तो कोर्ट ने इस शर्मनाक बताया। साथ ही कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि महिलाओं की मर्यादा होती है। क्यों न इसे महिला आयोग के संज्ञान में लाया जाए।
हाईकोर्ट ने प्रसव के संबंध में जरूरी कदम उठाने और एमओयू पर दोबारा विचार करने के निर्देश दिए। कोर्ट में सुनवाई के दौरान चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त सचिव वीनू गुप्ता भी पेश हुईं। मामले में अगली सुनवाई 27 सितंबर को तय की गई है।
इस मामले में कोर्ट में याचिका दायर करने वाले सीआरडी हेल्थ केयर की ओर से वकील सिद्धार्थ जोशी ने अपना पक्ष रखा। वकील ने कहा कि सरकार द्वारा गुढ़ामालानी के अस्पताल के साथ पहले तो पीपीपी मॉडल पर एमओयू किया गया, बाद में सरकार ने एमओयू को निरस्त कर दिया।
पीपीपी मोड पर एमओयू होने के बाद याचिकाकर्ता ने 45 लाख रुपए खर्च कर अस्पताल में कई आवश्यक सुधार किए। अस्पताल के खाली पदों को भरा गया और 11 महीने में 30 ऑपरेशन भी किए गए। अस्पताल का एमओयू निरस्त होने के बाद हालात फिर से बिगड़ने लगे हैं।