मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जिसका अंदेशा था, वही हो गया। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल को भी इसी तरह का फैसला आने की उम्मीद दिखाई देने लगी थी। राजस्थान हाई कोर्ट के विधानसभा अध्यक्ष को सचिन पायलट और उनके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई न करने निर्देश देने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मुसीबत बढ़ने के आसार हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट का निर्णय आने के बाद विधानसभा सीपी जोशी के सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा फिर से खटखटाने का रास्ता खुल गया है। विधानसभा अध्यक्ष अपने क्षेत्राधिकार को चुनौती देने वाले फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय से व्यवस्था देने की अपील कर सकते हैं। उच्चतम न्यायालय इस मामले की सुनवाई सोमवार को करेगा।
हाईकोर्ट ने विधायक पृथ्वीराज मीणा की तरफ से दायर केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अर्जी भी मंजूर कर ली है। हालांकि हाईकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विधायकों की सदस्यता पर फैसला लेने के अधिकार में कोई दखल नहीं दिया है, लेकिन उसके द्वारा 14 जुलाई को जारी नोटिस पर स्टे लगा देने से मामला पेचीदा भी हो गया है।
सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की रणनीति सोमवार को विधानसभा सत्र बुलाने की थी। लेकिन सचिन पायलट समेत उनके खेमे के 19 विधायकों की सदस्यता पर स्थगन आदेश आने के बाद मामला उलझ गया है। 19 विधायक अशोक गहलोत सरकार की मुसीबत बढ़ा सकते हैं। क्योंकि ऐसी स्थिति में 200 सदस्यों वाली विधानसभा में राज्य सरकार को 101 विधायकों की आवश्यकता पड़ेगी।
हालांकि मुख्यमंत्री गहलोत इस आंकड़े से अधिक विधायकों का दावा कर रहे हैं, लेकिन विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की नौबत आने पर पैदा होने वाली परिस्थिति का किसी को अंदाजा नहीं है। सूत्र बताते हैं कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री गहलोत राज्यपाल से भेंट कर सकते हैं।